बिहार राज्य के जमुई ज़िला के गिद्धौर प्रखंड के छेगुवा पंचायत से रंजन की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से पंचायत समिति सदस्य शम्भू शरण मंडल से हुई। शम्भू शरण मंडल कहते है कि महिलाओं के नाम से जब से जमीन खरीदा जाने लगा तब से महिला का आमदनी बढ़ रहा है। महिला सुरक्षित महसूस कर रही है और समाज में इज्जत पाने लगी है। घर के बड़े बुजुर्ग भी महिला को सम्मान के नज़र से देखता है। आज महिला पुरुष के बराबर में आगे बढ़ रही है। महिलाओं के नाम जमीन होने से उनके जीवन में परिवर्तन दिखने लगा है। महिलाओं के मन से डर भय ख़त्म हो गया है। पहले महिला को तलाक के माध्यम से त्याग दिया जाता है। अब महिला इतनी आत्मनिर्भर बन गयी है कि उनके पास अब संपत्ति की इतनी है कि वो जी खा सकती है। महिला उद्योग ,व्यापार कर सकती है।

बिहार राज्य के जमुई ज़िला के गिद्धौर प्रखंड के रतनपुर पंचायत के कैरा कादव टोला ,वार्ड नंबर 11 से रंजन की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से वार्ड सदस्य भवन कुमार से हुई। भवन कुमार कहते है कि महिलाओं के नाम से जमीन खरीदा जाए और समाज की महिलाओं को आगे बढ़ाया जाए। महिलाओं के नाम जमीन होने से उनका आमदनी बढ़ेगा और आमदनी बढ़ने से उनके परिवार का विकास होगा। जब तक महिला का विकास नहीं होगा तब तक समाज का विकास संभव नहीं होगा।

बिहार राज्य के जमुई ज़िला के झाझा प्रखंड से रंजन की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से सिमुलतला निवासी करुणा सिंह से हुई। करुणा बता रही है कि अगर महिलाओं के नाम से जमीन होता है तो उनकी इनकम बढ़ेगी। अगर प्रॉपर्टी में व्यापार करती है तो अन्य महिलाओं को जोड़ कर उनकी तरक्की करने में सहायता कर सकती है। बच्चों की शिक्षा भी अच्छे से करवा सकते है। आत्मनिर्भर बनने पर महिलाएँ प्रताड़ित नहीं हो सकती है वो प्रताड़ना से दूर रहेगी , वह घरेलू हिंसा से बच सकती है।

बिहार राज्य के जमुई ज़िला के गिद्धौर प्रखंड के स्वजना ग्राम से रंजन की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से कुमारी दीपा से हुई। दीपा कहती है कि महिलाओं के नाम जमीन जब ख़रीदाता है तो महिलाओं को आर्थिक परिवर्तन और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। महिलाएँ आत्मिक रूप से आत्मनिर्भर बनती है। पैतृक संपत्ति में महिलाओं को अधिकार मिलने से समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिला है। लेकिन अभी भी परिवार में जागरूकता और सामाजिक मान्यताओं में बदलाव की आवश्यकता है। महिलाओं को जब से जमीन मिलना शुरू हुआ है तब से महिलाओं के जीवन में परिवर्तन हुआ है। उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जा रहा है। वो खुद में गर्व महसूस करने लगी है। घर में अधिकार मिलने से बच्चों की परवरिश अच्छे से कर सकती है

बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड से संवाददाता रंजन कुमार ने केबी तिवारी से साक्षात्कार लिया। जिसमें केबी तिवारी ने कहा कि अगर महिला के नाम पर भूमि लिया जाए तो ना केवल आय में वृद्धि होगी बल्कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा। रहन सहन में बदलाव आयेगा। महिलाओं के नाम पर जमीन होने से उनका आत्मबल भी बढ़ता है। महिला के नाम से जमीन पहले नहीं खरीदते थे। लेकिन अब खरीदा जा रहा है। अगर महिला ठीक से रहती है तो पूरा परिवार आगे बढ़ता है

बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड से संवाददाता रंजन कुमार ने नीलम से साक्षात्कार लिया। जिसमें नीलम ने कहा कि अगर महिला के नाम पर भूमि लिया जाए तो बहुत बदलाव आएगा। महिला आर्थिक रूप से सशक्त होगी और अपने बच्चों का भरण पोषण कर पायेगी। इसके साथ ही महिला का सम्मान भी बढ़ता है

बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड से संवाददाता रंजन कुमार ने सारिका से साक्षात्कार लिया। जिसमें सारिका ने कहा कि अगर महिला के नाम पर भूमि लिया जाए तो उससे महिलाओं की आमदनी और जिम्मेदारी दोनों बढ़ती है। इसके बाद महिला रोजगार कर व्यवसाय कर के आगे बढ़ सकती हैं। जमीन मिलने से ना सिर्फ महिला का बल्कि उनके बच्चों का भी भविष्य अच्छा होता है। वो पाने जीवन का निर्णय भी खुद लेती हैं कि उन्हें जमीन पर घर बनाना है या आमदनी कैसे करनी है। जमीन मिलने से महिला कई मायनों में सक्षम हो जायेगी

बिहार राज्य के जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड से संवाददाता रंजन कुमार ने श्रोता भगवान से साक्षात्कार लिया। जिसमें भगवान ने कहा कि अगर महिला के नाम पर भूमि लिया जाए तो उससे महिलाओं को कोई लाभ नहीं होता है। महिलाओं के नाम पर जमीन हुआ भी तो वो घर से बाहर जा कर खेती करेंगी नहीं। महिला का आत्मविश्वास तो बढ़ेगा। लेकिन परिवार में कलह का भी घर होगा लोग आजकल पत्नी के नाम पर जमीन इसलिए लेते हैं कि दूसरे भाईयों का उस जमीन में कोई हक ना हो। लेकिन नाम पर जमीन रहने से महिला के जीवन में कोई बदलाव नहीं आता है 

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नमस्कार /आदाब श्रोताओं। मोबाइल वाणी पर हमारे सहयोगी शनि जी ने वीमेन लैंड राइट्स यानि महिला भूमि अधिकार पर जन साहस संस्था के साथ काम करने वाली भावना दीदी से साक्षात्कार लिया।बातचीत के दौरान भावना दीदी ने बताया की कैसे उन्होंने कई महिलाओं को उनका अधिकार दिलवाया और साथ ही खुद की भी एक अलग पहचान कायम की।तो आइये सुनते हैं भावना दीदी के संघर्ष और सफलता की कहानी उन्हीं की जुबानी।