बिहार राज्य डाटा कंप्यूटर ऑपरेटर संग के बैनर तले डाटा एंट्री ऑपरेटर ने दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल किया अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें और पुरी ख़बर सुनें
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हमारे समाज में लड़की के जन्मदिन पर मातम और लड़का के जन्मदिन पर मिठाई बांटने का प्रचलन देखने को मिलता है जबकि घर की बेटी के अंदर सबसे अधिक सेवा भाव होता है फिर भी लोगों के दिमाग में लड़का के प्रति या भावना बन गया है कि वह वश चलता है जबकि लड़का और लड़की में कोई फर्क नहीं है लेकिन इस बात को समझने के लिए आज भी समाज तैयार नहीं है इसके कारण लड़की को कम पढ़ाई लिखाई कर कर उसे विदा कर दिया जाता है बुढ़ापे में अगर बेटा और बहू माता-पिता का देखभाल नहीं करता है तो वही लड़की माता-पिता का सहारा बन जाती है
समाज में आज भी लिंग भेद का बोलबाला देखने को मिल रहा है लड़की को गर्भ में ही खत्म कर दिया जाता है और लड़की अगर होते हैं तो उसे दुनिया की सैर कराया जाता है जिस बहनों को लगातार दो से तीन लड़कियां जन्म ले लेती है उसे ससुराल पक्ष के लोग प्रताड़ित करना प्रारंभ कर देते हैं यहां तक कि उसे हिंसा का भी सामना करना पड़ता है
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भारत में लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 से बढ़कर 21 वर्ष करने की कवायद चल रही है। गरीबी ही इस समस्या की मूल वजह है ऐसे में सरकार की भूमिका बेहद अहम हो जाती है कि ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता पहुंचा कर समस्या को काम किया जा सकता है। कोई विकल्प नहीं होने की वजह से ही गरीब परिवार बाल विवाह का विकल्प चुनते हैं अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें और पूरी जानकारी सुने
भारत में 26 नवंबर का दिन संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है हाथ से लिखी है संविधान की ओरिजिनल कॉपी अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें और पूरी जानकारी सुने
