हमारे समाज में लड़की के जन्मदिन पर मातम और लड़का के जन्मदिन पर मिठाई बांटने का प्रचलन देखने को मिलता है जबकि घर की बेटी के अंदर सबसे अधिक सेवा भाव होता है फिर भी लोगों के दिमाग में लड़का के प्रति या भावना बन गया है कि वह वश चलता है जबकि लड़का और लड़की में कोई फर्क नहीं है लेकिन इस बात को समझने के लिए आज भी समाज तैयार नहीं है इसके कारण लड़की को कम पढ़ाई लिखाई कर कर उसे विदा कर दिया जाता है बुढ़ापे में अगर बेटा और बहू माता-पिता का देखभाल नहीं करता है तो वही लड़की माता-पिता का सहारा बन जाती है
