दिल्ली के सूंदर नगरी से काजल मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को पिता की पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलना चाहिए। लेकिन वह डर के कारण नहीं लेती है। जमीन में अधिकार मिलने से रिश्तेदारों से लड़ाई हो जाता है
दिल्ली के सुंदरनगरी से अनारो मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलना चाहिए। लेकिन अधिकार मांगते हैं तो रिश्तेदारी खराब हो जाती है
दिल्ली से हमारे श्रोता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को अधिकार मिलना चाहिए। उनका कहना है कि जो व्यक्ति खुश है वह और आगे बढ़ता है और जो दुखी है वह आगे नहीं बढ़ पाते हैं। लोग दूसरे लोगों के दुःख को नज़रनादज कर देते हैं। वक़्त निकल जाने पर लोग दूसरे व्यक्ति को पूछते तक नहीं हैं। समाज को बदलना होगा और दूसरे के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए
दिल्ली के न्यू सीमापुरी से अनीता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को प्रॉपर्टी में भी हिस्सा मिलना चाहिए। जो भी प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो महिला के नाम पर ही प्रॉपर्टी में रजिस्ट्री होनी चाहिए।
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मध्य प्रदेश राज्य के उमरिआ जिला से शिव कुमार यादव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि विधवाएं अदालत का चक्कत लगाती रहती हैं और ससुर और जेठ जमीं पर कब्ज़ा कर लेते हैं।विधवाओं को सम्पत्ति से बेदखल कर दिया जाता है।कानून का पालन सही तरीके से हो रहा है या नही इसे देखने के लिए एक कमिटी का गठन करना चाहिए।प्रशानिक अधिकारीयों के द्वारा ही शोषण होता है। जैसे - एसडीएम,तहसीलदार,प्रभारी। पंचायत या न्यायालय विधवाओं को कानून से नीचे देखती है।लोगों की सोच होती है विधवाओं के आगे -पीछे कोई होता नही है तो वो लाचार है। कार्यपालन मजिस्ट्रेट को एक समिति बनाकर कानून के कर्यान्वयन पर नज़र रखने के लिए एक कमिटी बनाना चाहिए। तब सभी कानून का लाभ उठा पाएंगे
मध्य प्रदेश राज्य के उमरिआ जिला से शिव कुमार यादव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सभी राज्यों में कानून तो बनाया गया है लेकिन कानून का अमल नहीं हो रहा है। विधि सेवक द्वारा विधवाओं को क़ानूनी सलाह नही दी जाती है।समाज में विधवाओं को सम्पत्ति से बेदखल कर दिया जाता है। जेठ और ससुर की बात सुनी जाती है।प्रशासनिक तंत्र,जैसे आंगनबाड़ी, सरपंच,सेक्रेटरी विधायक,विधान सभा,लोकसभा सभी कानून में लापरवाही करते हैं। विधिक सेवक में बारह-बारह वकील हैं,लेकिन वो लोग विधवाओं एवं निशक्तों की सहायता नही करते हैं।
दिल्ली के न्यू सीमापुरी से सिम्मी मोबाइल वाणी के मध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाएं अगर मजबूर हैं तो उनको माता पिता के संपत्ति में हिस्सा लेना चाहिए ।
दिल्ली के सीमापुरी से उषा रानी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि मायके में महिलाओं का हक़ होना चाहिए। अगर ससुराल में लड़की खुश है और भगवान् ने उनको सब कुछ दिया है तो मायके में उनको हक़ नहीं मिलना चाहिए और अगर ससुराल में लड़की दुखी है तो मायके में वह अधिकार ले सकती हैं
पति की मृत्यु के बाद विधवा का उसकी ज़मीन पर अधिकार कोई दया नहीं, बल्कि उसका कानूनी हक़ है। ज़रूरत इस बात की है कि क़ानून की जानकारी, प्रशासनिक सहयोग और सामाजिक समर्थन तीनों एक साथ मिलें। तभी विधवाओं के लिए “क़ानून में अधिकार” वास्तव में “ज़मीन पर अधिकार” बन पाएगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- क्या आपके गांव/मोहल्ले में विधवाओं के नाम ज़मीन का म्यूटेशन आसानी से होता है? *--- पंचायत या स्थानीय नेता विधवा अधिकारों की रक्षा में किस तरह की भूमिका निभा रहे हैं? *--- बेदखली के मामलों में प्रशासन कितनी जल्दी कार्रवाई करता है? *--- और क्या कानूनी सहायता केंद्र गांवों तक प्रभावी ढंग से पहुँच पा रहे हैं?
