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कुल मिलाकर, महिलाओं के लिए संयुक्त स्वामित्व सिर्फ़ काग़ज़ी नियम नहीं है, बल्कि समाज को बदलने का एक मज़बूत ज़रिया है। यह महिलाओं को मज़बूत बनाता है, परिवार में संतुलन लाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए बराबरी की एक अच्छी मिसाल पेश करता है। महिलाओं को ज़मीन और संपत्ति में बराबर हक़ देना एक बेहतर और न्यायपूर्ण समाज की ओर बड़ा कदम है। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- क्या आपके परिवार की ज़मीन या घर महिलाओं के नाम पर भी संयुक्त रूप से दर्ज है? *--- अगर नहीं, तो क्या आप संपत्ति में बेटियों और बहुओं को बराबर अधिकार देने पर विचार करेंगे? *--- क्या आप मानते हैं कि महिलाओं को ज़मीन का अधिकार मिलने से परिवार ज़्यादा सुरक्षित और मज़बूत होता है? *--- क्या अगली पीढ़ी को बराबरी की सीख देने के लिए आप संयुक्त स्वामित्व अपनाना चाहेंगे?

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उत्तर प्रदेश राज्य के चित्रकूट जिला से 35 वर्षीय अरुण यादव मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि लड़कियों को मायके और ससुराल दोनों जगह बराबर हक़ मिलना चाहिए।माता और पिता का यह फ़र्ज़ होता है कि लड़की के नाम से जमीन करवा दिया जाए। लड़कों के नाम जमीन कर दिया जा रहा है लेकिन लड़कियों के नाम जमीन नहीं किया जा रहा है। लड़कियों के साथ अन्याय हो रहा है। लड़कियां भी पुरुषों से अधिक नाम रौशन करती हैं

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मध्य प्रदेश राज्य के उमरिया जिला से शिव कुमार यादव मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को समाज में आगे आकर यह बताना चाहिए वह समाज की सेवक हैं।महिला खुद महिला का ही शोषण करती हैं। पढ़ा लिखा व्यक्ति भी शोषण करते हैं। समाज की सेवा करके लोग तनख्वा लेने का काम करते हैं