श्रमिक वाणी के माध्यम से मोहम्मद वसीमुद्दीन बता रहे हैं कि उनके गांव बिहार में राशन कार्ड में केवाईसी का नियम निकाला गया है। जिसका लास्ट डेट दिसम्बर तक रखा गया है। वे अभी दिल्ली में रह रहे हैं। उन्होंने अपने दो बच्चों को गांव केवाईसी करवाने के लिए भेजा है जिसमे पांच से छः हजार रूपए का खर्चा है। अब यदि वे जायेंगे तो फिर उन्हें पांच से छः हजार रूपए लगेंगे। उनका कहना है ,इससे फायदा क्या होगा चार पांच किलो ही राशन मिलेगा।
मानेसर से श्रोता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इनका नौ महीने से ईएसआई कट रहा है। चोट लगी है मगर ईएसआई से कोई लाभ नही मिला है। अभी तक न ईलाज करवाया और न ही कोई बेनिफिट मिला है। कंपनी भी कुछ नही बताती है। परेशान किया जाता है
मानेसर से रामा देवी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इनको खांसी और चक्कर आता है। माथा दर्द से बेचैन रहती हैं। ईएसआई के डिस्पेंसरी जाने पर ठीक से नही देखते हैं और वहां कोई सुनवाई नही होती है।
आईएमटी मानेसर से शहवाज अंसारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इनको ईएसआई का पैसा निकालना है।एक ही कंपनी में चार साल का पैसा कटा है। बहन की शादी है और पैसा निकालने में दिक्कत हो रही है। कृपया मदद कीजिए।
हरियाणा के मानेश्वर से मोहम्मद शालिम ने श्रमिक वाणी के माध्यम से बताया कि वे ईएसआई में इलाज करवाने गए थे। उन्हें पेट में और पेट के ऊपर सीना में दर्द होता है। लेकिन ईएसआई में कोई सुनवाई नहीं होता है। उनका टॉयलेट भी बहुत बदबुदार होता है। इसके लिए उन्हें मदद चाहिए
हरियाणा के मानेश्वर से रवि कुमार श्रमिक वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि ईएसआई हॉस्पिटल में बिलकुल भी कोई कर्मचारी नहीं है ना टोकन काटने वाला। न पर्ची काटने वाला। एक आदमी मात्र बैठा हुआ है ,जिसके करण मजदूरों की भीड़ लगी हुई रहती है सेक्टर तीन ईएसआई में। इसलिए वे चाहते हैं कि कर्मचारी बढ़ायें जाए ताकि मजदूरों को दिक्क्त का सामना ना करना पड़े
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एड्स इस नाम से हम सभी भली भांति परिचित हैं इसका पूरा नाम है 'एक्वायर्ड इम्यूलनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम ' यह एक तरह का वायरस है जिसे एचआईवी के नाम से भी जाना जाता है।यह एक जानलेवा बीमारी है लेकिन आज भी लोगों में एड्स को लेकर सतर्कता नहीं है।साथ ही इसे समाज में भेदभाव की भावना से देखा जाता है। एड्स के प्रति जागरूकता फ़ैलाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। दोस्तों , हम सभी को एड्स को लेकर सतर्क रहना है ,साथ ही लोगों में सर्तकता लाने की भी ज़रुरत है।साथियों, एड्स का उपचार भेदभाव नहीं बल्कि प्यार है। आइये हम सभी मिलकर विश्व एड्स दिवस मनाए और लोगों में एड्स के प्रति अलख जगाए। सतर्क रहें,सुरक्षित रहें
श्रमिक वाणी के माध्यम से सौरभ बता रहे हैं कि उनके पिता को लिवर में दिक्क्त है। वे ईएसआई जाते हैं तो वहां इलाज करने में समस्या आती है। इसलिए वे चाहते हैं कि ईएसआई में अच्छे से इलाज हो।
फरीदाबाद के मिलाड कॉलोनी से करिश्मा श्रमिक वाणी के माध्यम से बता रही हैं कि जब वे ई एस आई जाते हैं तो उन्हें दवाइयों के लिए लाइन लगाना पड़ता है। काऊन्टर की कमी होने के वजह से लाइन बहुत लम्बी हो जाती है। जिसके कारण यदि वे सुबह जाते हैं तो रात के नौ भी बज जाते हैं। ये बहुत बड़ी समस्या होती है
