दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम से दिनेश चौधरी,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि श्रमिकों को सहयोग देने वाला व उन्हें हिम्मत प्रदान करने वाला कोई नहीं होता ,इसलिए वो संगठन का निर्माण नहीं कर पाते है। अगर वो संगठन निर्माण करते है तो कंपनी वाले ही उन्हें ताने मर कर उनके हिम्मत को तोड़ देते है। ऑडियो पर क्लिक कर सुनें दिनेश के विचार..