झारखंड राज्य के धनबाद जिला के बाघमारा प्रखंड से बीरबल महतो मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं, कि 15 अगस्त को देश में 72वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। परन्तु हमारा देश भले ही अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हो गया है पर फिर हमे पुनत: आजादी नहीं मिली है। यदि पुनत: आजादी मिली होती तो आज कन्या भ्रूण हत्या नहीं होती,दहेज़ प्रथा नहीं होती क्योकि आज दहेज़ प्रथा की बलि कितनी निर्दोश बेटियों को देना पड़ता है। अतः सरकार द्वारा सामाजिक जागरूकता ला कर इस पर रोक लगाने की जरुरत है। ताकि लोगों को यह अहसास हो सके की वो सही मायने में आजाद हैं।
झारखंड राज्य के धनबाद जिला के महुदा से राधू राय मोबाइल वाणी के माध्यम से देश की आजादी पर आधारित एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं। इस कविता के माध्यम से कहते हैं, कि क्या सही में आज हम सभी आजाद है। 72वां स्वतंत्रता दिवस हम सभी ने मिल कर मनाया। 15 अगस्त 1947 को हमे मिली आजादी। आजादी की ख़ुशी में हम जश्न के रूप में वर्षों के स्वतंत्रता दिवस मानते आ रहे, सरकारी गैरसरकारी सस्थानों में तिरंगा राष्ट्रीय गीत गाते आ रहे हैं।
झारखंड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला के बिष्णुगढ प्रखंड से राजेश्वर महतो मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं, कि देश को आजादी मिले 72 वर्ष बीत गए हैं। लेकिन हमारे देश आज भी कई विषन परिस्थितियों से गुजर रहा है। कई ऐसी जगहों में आज भी लोग बिजली,पानी,सड़क,स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा सहित कई अहम जरुरत की चीजों से वंचित हैं। हाँ यह सत्य है कि प्रधान मंत्री सड़क योजना के तहत कुछ नगरों में सड़क देखने को मिल रहा है। पर फिर भी सबसे बड़ी समस्या देश के लिए भ्रष्टाचार है। जहाँ बीना उपहार दिए सरकारी दफ्तरों में दो-दो तीन वर्षों तक टेबल में फाइलें पड़ी रह जाती है। तीन दशक पूर्व सरकारी कर्मी सुदुरवर्ती गांवों में रह कर अपनी देवा दिया करते थें। लेकिन आज ऐसा कुछ नहीं होता है आज करोड़ों रूपये का अस्पताल बन कर तैयार है। लेकिन स्वास्थ्य कर्मी शहर में रह कर अपनी इच्छा अनुसार ही गांवों में लोगों का ईलाज करने जाते हैं
Transcript Unavailable.
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स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा तो हमने भी फहराया, आपने भी फहराया। पर क्या हम आज भी सही मायने में उस तिरंगे के सभी रंगों का मतलब समझ पाए हैं..? केशरिया जो की देश की शक्ति और साहस को दर्शाता है, सफ़ेद अपनी चक्र के साथ शांति और सत्य का प्रतिक है, हरा उर्बरता,बृद्धि और पवित्रता को दर्शाती है। पर क्या हम अपने जीवन में इन आदर्शों का सम्मान कर पा रहे हैं..? अगर नहीं तो आखिर क्या वजह है की हम राष्ट्रवाद की उन्मादना में राष्ट्र निर्माण में हमारी भूमिकाओं को भूलते जा रहे हैं...?चाहे हालात कितने भी बुरे क्यों न हो, इंसान सपने देखना कभी नहीं छोड़ता है. बच्चे से लेकर बुज़ुर्ग, गरीब से लेकर अमीर सभी सपने देखते है, कुछ अपने लिए तो कुछ इस देश के लिए। इस स्वतंत्रता दिवस पर आपने इस देश के लिए क्या कोई सपना देखा है..? चाहे हममे लाख बुराइयां हो, चाहे हम सब एक दूसरे से कितने ही भिन्न क्यों न हो पर देश ,तो हम सब का है और इस देश पर गर्भ हम सबको है. देश के एक नागरिक तथा अपने समुदाय का एक सदस्य होने के नाते क्या आप ने कोई संकल्प लिया जिससे यह देश आगे की तरफ थोड़ा और बढ़ सके...?इस संकल्प को पूरा करने के लिए आप ने क्या रास्ता सोचा है..?भारत की 73 वें स्वतंत्रता दिवस पर आप इस देश को विश्व के किस स्थान पर देखना चाहते हैं...? और यह स्थान हासिल करने के लिए हमे क्या-क्या करना पड़ेगा...?
