झारखण्ड राज्य के जिला बोकारो से जे एम् रंगीला जी साथ में किसान सह मुखिया दिलीप कुमार जी मोबाइल वाणी के माध्यम से किसानो की स्थिति पर कहते है की सरकार की ओर से किसानों के लिए घोषणाएं जरूर हुई पर व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है।डुमरी के जिस पैक्स को धान खरीद के लिए केंद्र बनाया गया है उनके पास जब धान लेकर जाते है , तो कहते कि अभी पैसे नहीं ,और ना ही वह पर खरीदार के लिए कोई आदमी है ,कहते है आज आइये कल आइये तो इस परिस्थिति में किसानों को धान को लेकर चक्कर लगाना पड़ता है। बताते है की विगत वर्ष कुछ धान इन्होने बिक्री की थी जिसका पैसा एक वर्ष बाद आया।किसानो की स्थिति बहुत दयनीय है इतना ही नहीं फसलों का समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है।किसानो को संगठित होने की जरुरत है तभी उनके आंदोलन सफल हो सकते है।

झारखंड राज्य के ज़िला धनबाद प्रखंड नावाडीह से जे.एम रंगीला ने नवाडीह के मुखिया दिलीप कुमार ,जो खुद कृषि कार्य से जुड़े हुए हैं और किसान के स्थिति के बारे में बता रहे है कि देश की आज़ादी के 70 वर्ष हो जाने के बावजुद देश के किसान की हालत में कोई सुधार नहीं आई है ,क्योंकि देश में कई सरकारें बनी साथ ही कई नेता देश के प्रधानमंत्री भी बने। पद ग्रहण करते दौरान सभी नेता देश के किसानों के हित से जुड़े कई वादें किये। परन्तु वह वादा आज तक पूरा नहीं हो सका।जिससे कारण आज देश के किसान की स्थिति काफी ख़राब हो गई है। आज किसान मज़बूरी में बस कृषि कार्य से जुड़े हुए हैं। सरकार ने किसान की स्थिति पर आज तक ध्यान नहीं दिया।राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने किसानों से यह वादा भी किया था, कि किसानों की आय दो वर्ष में दुगनी कर दी जाएगी परन्तु सरकार के पास किसानों की आमदनी का कोई डाटा नहीं है ,आज देश के किसानों की सबसे बड़ी समस्या है, पानी है। क्योंकि अगर वर्षा नहीं होती है तो किसान को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि आज धरातल पर जल का श्रोत काफी नीचे चला गया है।

''धनबाद राज्य के मोबाइल वाणी के प्रभारी जेएम रंगीला जी और नवाडीह के निर्मल महतो जी जो की पेसे से एक किसान और भारतीए जनता पार्टी बोकारो जिला के महमंत्री भी है। जो की मोबाइल वाणी के जेएम रंगीला जी ने उन से किसानो के हित के लिया उनसे कुछ बातचीत किया और उन्होंने कहा कि देश में किसान की स्थिति का जिम्मा सरकार है और तो और देश में अब तक कोई भी किसान को राष्ट्रीय और राज्य की बागडोर नहीं मिल पाया। देश में आजदी से अब तक देश में केवल राज जमींदार अदि के बेटे को ही देश की बागडोर मिला है। जो की किसानो के हित में बात ही नहीं करते है ,और उन्होंने कहा कि देश और राज्य में जो अभी वर्तामन सरकार है. जो की देश की किसान को जो वादा किया उसे 3 -4 सालो में नहीं किया जा सकता। क्योंकि किसानो की स्थीति 70 वर्ष पूर्व से ही चली आ रही है इसे धीरे -धीरे ही खत्म किया जा सकता है। इस के लिए सरकार ने समर्थन मूल्य को निर्धारित किया गया परन्तु नौकरशाह ने किसानो को समर्थन मूल्य और तो और उनके सामना को सही जगह पर नहीं पहुंचते है। और सरकरी कर्मचरियों को तो 60 वर्ष के बाद पेंसन मिल जाता है परन्तु किसानो को नहीं मिलता। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए। कि किसान को भी सरकार 60 वर्ष के बाद पेंशन मिलाना चाहिए। तभी जा कर देश और राज्य का विकास हो पए गए।

झारखण्ड मोबाइल वाणी का कृषि कार्यक्रम का असर कृषि क्षेत्रो में देख जा रहा है. धनबाद मोबाइल वाणी के प्रभारी जेएम रंगीला जी ने हमे जानकरी दी की कृषि क्षेत्रों में झारखण्ड मोबाइल वाणी का असर देख जा रहा है.इस कर्यक्रम को लगातर चलाते रहना चहिये। ये कहना है किसानों का और उन्होंने कहा की गाँव के लोग और किसान भई इस कार्यक्रम को सुनते है, और इस कार्यक्रम माध्यम से किसानो को उन्नत खेती की जानकारी मिलती है। जो की झारखण्ड मोबाइल वाणी का एक अच्छा कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम को सुनाने से उन्हें खेती कैसे की जाती है ,और कौन -कौन से खाद्य खेतों में डाला जये ये सब जानकारी इस कर्यक्रमके माध्य्म किसानो को मिला पा रहा है।

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हजारीबाग जिला के उमेश जी जो की एक किसान है वे अपनी आपबीती बता रहे है। झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम उनका कहना है की हमे सरकार न तो सब्सिडी दे रही है न ही हमें हमारी उपज किया हुवा का मूल्य भी प्रप्त हो रहा है हमे सरकार सब्सिडी में खाद्य दे। ताकि हमरी कि

राज्य -झारखण्ड के जिला गिरिडीह,ग्राम -पूर्वाधाम ,पोस्ट -शेषम,थाना -बिरनी ग्राम से रामेश्वर कुमार वर्मा ने मोबाईल वाणी के माध्यम से बताया कि यहां गावों में ज्यादातर गेहूं की खेती होती है और यहाँ सिचाई के साधन न होने के कारण, किसान नदी के किनारे मशीन लगाकर खेती करते हैं। जिसके फलस्वरूप यहाँ के किसान घर में रह कर ही अपना गुजर-बसर कर रहे हैं । जिसके कारण किसानों को बाहर दूसरे शहरों या राज्यों में जीवन-यापन के लिए नहीं जाना पड़ता है | ये अनुकूल रूप से अपने कामों में लगे रहते है जिससे इन्हे कोई दिक्कत नहीं होती है।साथ ही गाँव में पढाई-लिखाई का भी उचित साधन है।

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