Bokaro: Vasudev Turi called from Nawadih to update about the Ram Charit Manas Jal yatra to be held at Mungo village from the 26th of April. He also reported that the Jal yatra will be taken out beside the Damoder river by three hundred and thirty girls carrying water pots followed by villagers and many respected residents from the region.
Bokaro: J M Rangeela called from Nawadih, Bokaro to inquire about soil testing of farming land and also where such tests can be conducted.
बोकारो: नावाडीह, बोकारो से जे.एम. रंगीला और वासुदेव तुरी ने संयुक्त रूप से विस्थापितों के लिए वर्षो से लड़ाई लड़ने वाले नेता श्यामसुन्दर महतो जी से विस्थापन पर बातचीत की इस बातचीत में उन्होंने झारखण्ड मोबाइल वाणी को बताया कि ललपनिया-डुमरी रेल लाइन के लिए १० गांवों के लगभग १५०० एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया जिसमे २५० परिवार विस्थापित हुए और इसपर लगातार आन्दोलन किये जा रहे है लेकिन सरकार की गलत नीतियों के कारण विस्थापितों को उचित लाभ नही मिल रहा है.साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि २० साल के आन्दोलन में नियोजन में कुछ खास सफलता नही मिली है लेकिन आपूर्ति में कुछ लोगो को नियोजन दिलाने में विस्थापित संगठन कुछ हद तक सफलता जरुर पाई है.वे कहते हैं कि वर्षों से आज तक सही तरह से विस्थापन नीति के लागु नही होने के पीछे कारण है सरकार के इस पर उदासीन रवैया.उन्होंने कहा कि विस्थापितों को न्याय दिलाने के लिए विथापन नीति को सही तरीके से लागु करने की आवश्यकता है.
बोकारो: जे. एम. रंगीला ने झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि बेरमो अनुमंडल के गोमिया प्रखंड के ललपनिया में १९८७ में तेनुघाट विद्युत निगम की स्थापना हुई थी.इस प्लांट में ललपनिया, जावा,कोदवा टाड़,सड़क टोला,तिलैया आदि गांवों के ३६० एकड़ जमीन अधिग्रहण की गई थी. १९९०-९१ में ललपनिया-डुमरी रेलवे लाइन के लिए उपरोक्त गांवों के अतिरिक्त कई गाँव के किसानो के जमीनों का अधिग्रहण किया गया था.जिसमे से कुछ किसानों को मुवावजा मिला और कुछ को नही मिला वे आज भी भू अर्जन विभाग के दफ्तर के चक्कर कट रहे हैं विचारणीय प्रश्न तो यह है जहाँ एक ओर किसानों को उनके जमीन के बदले मुवावजा तक नही मिला वंही दूसरी और निगम के २५ साल पुरे होने के उपलक्ष्य में रजत जयंती मनाई गई.विस्थापित नेता विनय महतो के मुताबिक आज भी २०% किसानों को मुवावजा नही मिल पाया है.वे लोग रोजगार के आभाव में अन्य राज्यों में पलायन का रहे हैं. अखिल भारतीय किसान सभा के गोमिया अंचल अध्यक्ष लखन लाल महतो ने बताया कि रेलवे लाइन के कारण विस्थापित हुए लोग २० साल से आन्दोलन कर रहे है लेकिन अभी तक उन्हें मुवावजा नही मिली है.
बोकारो:जे.एम.रंगीला और वासुदेव तुरी ने नावाडीह, बोकारो से झारखण्ड के पूर्व खाद्य आपूर्ति तथा भू-राजस्व मंत्री और वर्तमान में टुंडी के विधायक श्री मथुरा प्रसाद महतो से झारखण्ड मोबाइल वाणी पर चलाए जा रहे विस्थापन अभियान के लिए बातचीत की जिसमे वे कहते हैं कि विस्थापन यहाँ पर कोई नया मुद्दा नहीं है.विस्थापन का दर्द यहाँ के लोग वर्षों से झेल रहे हैं.पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आज कंपनियों द्वारा जमीन अधिग्रहण किया जाता है लेकिन विस्थापितों को न तो मुवावजा मिलता है और न ही नौकरी दी जाती है ऐसा राज्य और केंद्र दोनों सरकारों की उदासीनता के कारण होता है, उन्होंने कहा कि भू-राजस्व मंत्री होने के नाते विस्थापन के मामले को कई बार उठाया जिसमे विस्थापन के कई मामले न्यायालय तक पहुंची है. आज तक विस्थापन नीति के लागु न होने के पीछे भी केंद्र सरकार जिम्मेदार है. उन्होंने कांके नगड़ी के मुद्दा पर कहा कि यह मामला अभी न्यायालय में है और इस पर अभी कुछ नही कहा जा सकता है.
बोकारो: नवाडीह, बोकारो से जे .एम. रंगीला ने झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से विस्थापन पर कहते हैं कि बोकारो जिला के बेरमो क्षेत्र में कोयला उत्खनन का कार्य ५ के दशक से आरम्भ हुआ है। उस समय यहाँ पर सात कोयला का खादान था। निजी कंपनी करमचंद थापर एंड कंपनी के चिरकुंडा से लेकर भुरकुंडा तक 214 खादान इस कंपनी की थी। यहाँ पर कम्पनी ने कई बड़े लोगो को खदान सौप रखी थी। यही अजः थी यहाँ पर मजदूरों को शोषण हो रहा था। हालाँकि 1971 में राष्ट्रीयकारण होने से मजदूरों में आशा जगी अब उनका शोषण नही होगा। लेकिन ऐसा नही हुआ। इसके बाद तो लोगो के जमीन विभिन्न परियोजनाओं के लिए अधिग्रहण किया गया लेकिन कई लोगो को मुवावजा तो मिली लेकिन नौकरी किसी को नही मिली। नौकरी के आस में लोगो की मृत्यु तक हो गई लेकिन नही मिली। सीटू नेता के अनुसार उचतम न्ययालय के मुताबिक १ डिसमिल जमीन भी खदान में गया है उन्हें नौकरी मिलनी चाहिए। लेकिन ऐसा नही हुआ और न ही किसी को नौकरी मिली अब नतीजा यह है कि लोग देहादी मजदूरी कर जियन निरवहन कर रहे हैं।
बोकारो: उमेश उजागर ने नवाडीह, ऊपरघाट, बोकारो से झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि यहाँ पर डीवीसी, सीसीएल जैसे कंपनी है , वे कहते हैं कि जो वर्कर इन कंपनियों में काम करते है उनके बच्चों के पढ़ाई के लिए बस का भाड़ा कंपनी उठाती है लेकिन यहाँ के गरीब विस्थापित जिनका जमीन कंपनी में गया और उन्हें नौकरी और मुवावजा कुछ नही मिली है। उनके लिए कंपनी कोई सहायता नही करती है। आखिर यह कैसा नीति इन कंपनियों का?
बोकारो नवाडीह से जे एम् रंगीला एवं वासुदेव तुरी जी ने झारखण्ड मोबाइल वाणी पर कल्याणी परियोजना में लिपिक के पद पर कार्यरत भीम महतो ने, जो की सन १९८४ में अपने पिता के पश्चात इस पद पर अपना योगदान दिया और १९८८ में यूनाइटेड कोल वर्कर यूनियन के शाखा सचिव के पड़ से सक्रिय हुए एवं वर्ष २०११ में यूनियन के सचिव चुने गए ,झारखण्ड मोबाइल वाणी पर विस्थापन के सम्बन्ध में बात की और भीम जी ने बताया की जब ही कोई कारखाने खुलेंगे तो विस्थापन जैसे समस्या आयेगी मगर सीसीएल प्रबंधन लोगो को प्रलोभन देकर अपना कार्य कर लेती हैं और विस्थापितों के साथ न्याय नहीं करती हैं जिस कारन विस्थापन इस क्षेत्र की समस्या बन गयी हैं.आज विस्थापन के आन्दोलन के बल पर कई लोगो के अपनी राजनीती मुकाम बनाये वे आज विस्थापितों को भूल गए हैं. झारखण्ड बने एक दसक गुजरने के बाद नही विस्थापन नीति नहीं बन पाई हैं? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा की झारखण्ड में जो भी मुख्यमंत्री बने उन्होंने केवल अपनी सुध ली जिस कारन आज तक इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया हैं.आज सरकार की नीतियों के कारन विस्य्हपितो का यह हाल हैं. आन्दोलन के कारन कई लोगो को नौकरी एवं मुआवजा प्रदान किया गया हैं मगर प्रबंधन हमेसा इस आन्दोलन को कुचलने का प्रयास करती हैं जिस कारन आज विस्थापन एक गंभीर समस्या बनी हुई हैं.
बोकारो: नावाडीह,बोकारो से मनोज कुमार ने झारखण्ड मोबाइल वाणी एक गीत प्रस्तुत किया है.
बोकारो नवाडीह से झारखण्ड मोबाइल वाणी पर विस्थापन के सम्बन्ध में एक कविता प्रस्तुत किया जिसमे उन्होंने विस्थापन के अर्थ को बताया हैं.
