उत्तरप्रदेश राज्य के उगापुर से रेणु मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इन्हें बकरी पालन करना है लेकिन इनके पास पैसे नहीं है। इन्हे पैसों की ज़रुरत है
उत्तरप्रदेश राज्य के उगापुर से ईश्वरचंद गौतम मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि ये एक दो गाय लेकर गाय पालन करना चाहते है
उत्तरप्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर ज़िला के मझवां प्रखंड से लक्ष्मी देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि वो गाय और बकरी पालन करना चाहती है।
उत्तरप्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर ज़िला के मझवां प्रखंड से 36 वर्षीय गीता मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि भैंस का तबेला खोलना है।
उत्तरप्रदेश राज्य से गोविन्द प्रसाद की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से अमन भारती से हुई। अमन कहते है कि वो प्रयागराज के निवासी है। वो विद्यार्थी है और पशुपालन में जैसे बकरी पालन करने का सोच है। गोविन्द द्वारा इन्हे ट्रेनिंग की जानकारी दी गई और फंडिंग के बारे में भी बताया गया। 50 बकरी रखेंगे तो अन्य लोगों को काम में रख सकते है
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामय उपस्थिति में रीवा में आज प्राकृतिक खेती एवं गौ-पालन पर आधारित किसान सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस किसान सम्मेलन का लाइव प्रसारण आज छिंदवाड़ा जिले में किसानों द्वारा देखा और सुना गया। जिले के विभिन्न स्थानों पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।
कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अग्रिम कुमार के निर्देशन में "दुग्ध समृध्दि सम्पर्क अभियान" के द्वितीय चरण के अंतर्गत गत दिवस उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ.एच.जी.एस.पक्षवार द्वारा विकासखण्ड अमरवाड़ा के ग्राम करबडोल व गाडरवारा के पशुपालकों का सत्यापन किया गया। इसके बाद पशु चिकित्सालय अमरवाडा का निरीक्षण किया गया । निरीक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारियों को सभी विभागीय लक्ष्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिए गए ।
अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.
अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.
अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.
