हमारी सूखती नदियां, घटता जल स्तर, खत्म होते जंगल और इसी वजह से बदलता मौसम शायद ही कभी चुनाव का मुद्दा बनता है। शायद ही हमारे नागरिकों को इससे फर्क पड़ता है। सोच कर देखिए कि अगर आपके गांव, कस्बे या शहर के नक्शे में से वहां बहने वाली नदी, तालाब, पेड़ हटा दिये जाएं तो वहां क्या बचेगा। क्या वह मरुस्थल नहीं हो जाएगा... जहां जीवन नहीं होता। अगर ऐसा है तो क्यों नहीं नागरिक कभी नदियों-जंगलों को बचाने की कवायद को चुनावी मुद्दा नहीं बनाते। ऐसे मुद्दे राजनीति का मुद्दा नहीं बनते क्योंकि हम नागरिक इनके प्रति गंभीर नहीं हैं, जी हां, यह नागरिकों का ही धर्म है क्योंकि हमारे इसी समाज से निकले नेता हमारी बात करते हैं।
सुनिए एक प्यारी सी कहानी। इन कहानियों की मदद से आप अपने बच्चों की बोलने, सीखने और जानने की क्षमता बढ़ा सकते है।ये कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपके बच्चे ने ये कहानी सुनी? इस कहानी से उसने कुछ सीखा? अगर आपके पास भी है कोई मज़ेदार कहानी, तो रिकॉर्ड करें फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।
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बिहार राज्य के पश्चिम चम्पारण जिला से अनारूल अंसारी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है की उनके क्षेत्र में नल जल का मोटर खराब हो चूका है
शादाब आलम बता रहे है की उनको नहीं मकान बनाने के लिए आवास योजना का लाभ नहीं मिला है और नहीं कोई फंड मिला है |
नहीं आता है नल जल योजना का पानी और नहीं कभी किया जाता है चालू
नहीं आ रहा है नल में जल सिर्फ सिखावे के लिए लगा कर छोड़ दिया गया जबसे लगा है आज तक नल से जल कभी नहीं निकला |
पश्चिम चंपारण से एक श्रोता बता रहे हैं की नहीं चलता है नल जल
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