संतकबीरनगर: मेंहदावल थाना क्षेत्र के परसा पाण्डेय गांव में सर्प दंश से एक व्यक्ति की मौत हो गई। वह खेत में मेड़ बांधने गया था।मेंहदावल के परसा पाण्डेय गांव निवासी सागर चौहान (35) पुत्र जोखन अपने खेत में मेंड़बंदी करने गए थे।इसी दौरान सांप ने ड़स लिया। इसके प्रभाव से उनकी मौत हो गई। वे ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन पोषण करते थे। मौत की सूचना से परिवार में कोहराम मच गया।
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आकाशीय बिजली की चपेट में आने से पशु चराने गए चरवाहे में 07 घायल, 01 की हालत गंभीर, मचा हड़कंप आनन-फानन में घायलों को 108 एंबुलेंस से लाया गया अस्पताल,समय पर पहुंचकर 108 एंबुलेंस कर्मियों ने घायलों को पहुंचाया CHC मेंहदावल इलाज जारी ।आकाशीय बिजली गिरने की चर्चा क्षेत्र में तेज , परिजन हल्कान।
संतकबीरनगरः लापरवाह चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कर्मियों पर गिरिराज सीएमओ ने आकस्मिक किया निरीक्षण निरीक्षण के दौरान 10 स्वास्थ्य कर्मी समिति चिकित्सक रहे नदारद, सीएमओ ने वेतन रोका मांगा अस्पटीकरण साथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का मामला
उतर प्रदेश राज्य के संत कबीर नगर जिला से राम प्रकश सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया की भूमि विवाद के कारण महिलाएं आपस में लड़ती रहती हैं। वे अपने पति के नाम पर आपस में लड़ते रहते हैं जबकि उनके नाम पर जमीन नहीं है। महिलाओं को भी अपने अधिकारों के लिए लड़ते देखा गया है,इसलिए महिलाओं को अपनी संपत्ति का अधिकार मिलना ही चाहिए।
उतर प्रदेश राज्य के संत कबीर नगर जिला से राम प्रकश सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया की दहेज लेना भी महिलाओं के खिलाफ अपराध है। लेकिन दहेज रुक नहीं रहा है, जबकि महिलाएं दहेज के कारण अदालत में चक्कर लगा रही हैं। महिलाओं को दहेज उत्पीड़न के लिए अदालत में घसीटा जाना जारी है और घर पर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। अधिकार भी छीने जा रहे हैं क्योंकि ज्यादातर महिलाओं को घर में मार दिया जाता है। महिलाओं को सशक्त होना होगा
संतकबीरनगरः सब्जियों के दामों में लगातार हो रही वृद्धि के चलते आम जनमानस के रसोई घर से दूर होता जा रहा हरी साग सब्जी लोगों का कहना है कमाईं कम खर्च ज्यादा कैसे हो परिवार का भरण पोषण
उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से अलोक श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से हरिशंकर से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने लैंगिक असमानता के कारण के बारे में जानकारी दी उन्होंने बताया कि जो पुराना समय में मान्यता थी कुछ लोग अभी भी उसे ही मानते हैं और बेटियों को आगे बढ़ने से रोकते हैं। लेकिन समय परिवर्तन के कारण उनका बस नहीं चल रहा। महिलाये अपने अधिकार के लिए आवाज उठा रही हैं
