उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार पिता की संपत्ति पर बेटी का समान अधिकार होता है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 50 वर्षीय दीपक मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि इनकी माँ के नाम से जमीन है लेकिन सरकारी का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इसके लिए इन्होने बताया कि पहले कृषि विभाग में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा। इसके बाद ही इन्हे सरकारी योजना का लाभ मिल पाएगा जैसे खाद ,बीज ,सब्सिडी आदि। इसकी जानकारी लेने के बाद में इनकी माता ने रजिस्ट्रेशन करवाने का फैसला लिया ताकि सरकारी योजना का लाभ ले सके
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 50 वर्षीय दीपक मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि इन्होने विजय पाल चौधरी से मिल कर जमीन का पट्टा मिलने के विषय में जानकारी दिया। जानकारी पा कर विजय पाल संतुष्ट हुए और उस विषय में आगे का कार्य शुरू किया
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला के साउघाट प्रखंड से विजय पाल चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि महिला के पति की मृत्यु हो जाने पर वसीहत समय लेखपाल द्वारा बेटा ,बेटी और पत्नी के नाम पर जमीन की बात होती है। जब तक बेटी मायके में रहती है तो उसके नाम पर जमीन रहना ठीक है। लेकिन जब शादी कर के ससुरात जाती है तो ससुराल वाले लड़की को उसके जमीन को लेकिन परेशान करते है कि जमीन में नाम है तो वो मिलना ही चाहिए।इसकी को लेकर आगे यह जमीन विवाद का कारण बनता है और रिश्तों में मन मुटाव आता है।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अरविन्द श्रीवास्तव कहते हैं कि महिलायें कृषि कार्य करती तो हैं, लेकिन उनके नाम पर जमीन नहीं होने के कारण वो मजदूर वर्ग तक सीमित हो जाती हैं। जिससे उन्हें बहुत कम आय प्राप्त होती है। लेकिन अगर उनके नाम पर जमीन होगी तो वो बहुत सशक्त हो सकती हैं। महिलायें पुरुषों से अधिक मेहनत करती हैं। लेकिन जमीन अपने नाम नहीं रहने के कारण परेशान भी रहती है। सरकार भी कानून बना चुकी है कि पति की मृत्यु के बाद महिला के नाम और उसके बच्चों के नाम पर बराबर ही जमीन होगी विरासत के तौर पर। लेकिन अभी भी समस्या यह है कि महिलाओं को मालिकाना हक बेटों के द्वारा माँ को नहीं मिलता है और वो सिर्फ जमीन पर काम कर पाती हैं। उसका उपयोग अपने अनुसार नहीं कर पाती है
कल के नेता, आज की आवाज़” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक आह्वान है—युवाओं के लिए, समाज के लिए और नीति निर्माताओं के लिए। यदि युवाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण और अवसर दिए जाएं, तो वे भूमि न्याय के आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। भविष्य का भारत तभी सशक्त और न्यायपूर्ण होगा, जब आज की युवा आवाज़ भूमि पर समान अधिकार की मांग को मजबूती से उठाएगी। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- “हम अपने परिवार और समाज में ऐसी कौन-सी पहल कर सकते हैं, जिससे महिलाओं को ज़मीन में बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो? *--- “अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती जिला से 44 वर्षीय विजय पाल चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महिलाओं को जमीन का अधिकार मिलना चाहिए। महिलाओं के नाम जमीन नहीं होने से महिलाएँ हमेशा प्रताड़ित की जाती है। परिवार के सदस्य महिला को छोटी छोटी बातों पर उन्हें घर से निकल जाने को कहते है। अगर महिलाओं को जमीन का अधिकार मिलेगा तो इस तरह की दुर्व्यवहार उनके साथ घटित नहीं होगा।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 45 वर्षीय विजय पाल चौधरी कहते हैं कि महिलाओं का भी पैतृक संपत्ति में पूरा अधिकार है। साल 2005 से उनका हक कानून भी बन गया है। महिला के नाम जमीन हुआ तो महिला अपना व्यवसाय भी कर सकती है। इसके लिए उन्हें सरकार की तरफ से कुछ अनुदान भी मिल जाता है। जिससे की महिलाओं को आर्थिक रूप से काफी सहायता मिलती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिला अकेली नहीं लड़ सकती। उसके साथ परिवार समाज और सरकार का सहयोग जरूरी है। जब पति या भाई साथ देता है तब बदलाव तेज होता है। हम सभी बार बार कहते है की महिलाओं को अपनी आवाज़ उठानी चाहिए अपनी आवाज के लिए लड़ना चाहिए पर अगर वही पर उसके घर वाले उसका साथ दे। उसका पति या भाई उसका साथ दे लोग उसका साथ दे तो महिलाओं को इतनी लड़ाई करनी ही नहीं पड़ेगी। महिलाओं को उनके अधिकार आसानी से मिल पायेंगे। जो की महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण की तरफ एक मजबूत कदम होगा
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि परंपरा के नाम पर महिलाओं का हक छीन लेना गलत है। परंपरा समाज को जोड़ती है। पर अधिकार छीनने का जरिया नहीं रखती। हमारे देश में कई घरों में परंपरा के नाम पर महिलाओं को अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है। हमेशा महिला जब अपना अधिकार मांगना चाहती है, तो उसे यही कहा जाता है हमारे यहा ऐसा नहीं होता है। असल में तो हमारी परंपरा ने कभी कुछ कहा ही नहीं हमारी परंपरा ये कभी नहीं कहती की महिलाओं को अधिकार नहीं मिलना चाहिए। ये लोगों के बनाए हुए और फैलाए हुए झूठ हैं। परंपरा के नाम पर महिलाओं को हक से वंचित किया जा रहा है। इसलिए हमेशा अधिकार और परंपरा के बीच में सामंजस्य जरूरी है धन्यवाद
