उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं को सशक्त बनाने में भूमि अधिकार एक भूमिका निभा सकता है। कई राज्यों में 'वीमेन लेड फार्मिंग ' चल रहा है। इसका मतलब है महिलाएँ मिलकर खेती करेगी ,जिसमें वो सामान्य खेती या व्यापार को लेकर करेंगी। इसमें महिला जैसे घर में काम करती है वैसे ही वही काम करने पर उन्हें पैसे मिलता है। ये कार्य महिला बहुत अच्छे से तब कर सकती है जब महिला के नाम जमीन होगा। ऐसे में महिला अपना व्यापार स्थापित कर सकती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि अक्सर महिला जब अपना अधिकार लेना चाहती है तो उनसे कहा जाता है कि वो भाई बहन के रिश्ते को ख़राब कर रही है। बराबरी रिश्तों को कमज़ोर नहीं बल्कि मज़बूत बनती है। जबकि घरवालों को खुद से कहना चाहिए की भाई बहन को जब बराबर प्यार मिला है ,साथ बड़े हुए है तो प्रॉपर्टी में भी उन्हें सामान हिस्सा मिलना चाहिए
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 49 वर्षीय राकेश श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि अगर महिलाओं को मायके में अधिकार मिल जाए ,उन्हें प्रॉपर्टी में हिस्सा मिले तो इससे फायदा यह होगा कि जेवर ज्वारत की तरह आपातकालीन स्थिति में प्रॉपर्टी का हिस्सा से महिला को मदद मिलेगी।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमजान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से रामजी चौधरी से हुई। रामजी कहते है कि महिलाओं को मायके में जमीन का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। दो भाई और दो बहन है तो ऐसे में विवाद बढ़ेगा। इसलिए बहन को मायके में जमीन का अधिकार नहीं होना चाहिए। पति के हिस्से में बहन का हिस्सा है।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि हमारे देश में कानून तो बना हुआ है पर महिलाओं को भूमि अधिकार तब ही मिलेगा जब हम अपनी सोच बदलेंगे। केवल कानून होने से कुछ नहीं होता। कानून तब काम करता है जब घर के लोग उसे मानते है। जब बेटी का नाम जमीन पर जोड़ते है तो लोग बेटी पर भरोसा दिखाते है इससे यह होता है कि महिला के साथ पूरा परिवार बदलता है और धीरे धीरे समाज भी। जब महिला मज़बूत होती है तब देश भी मज़बूत होता है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि अक्सर बेटियों से कहा जाता है कि जायदाद में हिस्सा छोड़ दो तो घर में शांति रहेगी पर क्या हक़ छोड़ना ही अच्छाई होती है। बेटी को भावुक कर हस्ताक्षर करवा दिया जाता है और बाद में कहा जाता है कि वो अपने मन से हिस्सा छोड़ी है।बेटी का भूमि पर उतना ही हक़ है जितना बेटे का। बेटी अपना हक़ लेती है तो वो लालची नहीं होती वो केवल बराबरी होती है। असली संस्कार ये है कि बेटियों को बिना माँगे उनका हक़ मिल जाए
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि बहुत सी महिलाओं को अत्याचार इसलिए सहना पड़ता है क्योंकि उनके पास रहने के लिए ज़मीन नहीं होता। जब महिला के पास अपनी भूमि होती है तो वो गलत के खिलाफ खड़ी हो सकती है ,वो मज़बूर नहीं रहती। जमीन ,जायदाद जिन महिलाओं के पास होता है उनके साथ हिंसा का मामला भी कम होता है। जमीन केवल कागज़ का मामला नहीं है ये महिलाओं की ज़िन्दगी बचाने का ज़रिया भी है।
Transcript Unavailable.
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमजान अली मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महिलाओं से बात करने पर उनका विचार है कि जैसे बेटा को जमीन में हक़ मिलता है वैसे ही बेटी को भी बराबर का हक़ मिलना चाहिए।
