उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से सूर्यांश मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महिलाएँ चुप रहती है तो उन्हें समझदार कहा जाता है और वही महिलाओं के बोलने पर उन्हें चुप करा दिया जाता है। महिलाओं का अधिकार है कि वो गलत के ऊपर सवाल उठाए,अपनी बात रखे। ऑफिस हो या घर गलत के खिलाफ आवाज़ उठाना उनकी हक़ है।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से सूर्यांश मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महिला भी सबसे पहले इंसान है। लेकिन उन्हें माँ ,बहु ,बेटी के किरदार में बांध दिया जाता है। ये गलत नहीं है पर इसमें महिलाओं का असली पहचान खो जाता है। महिलाओं को अपने फैसले खुद लेने का अधिकार है। महिला अधिकार से पहचान बनाएगी तभी असली बराबरी आएगी
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से दीपा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि मायके की पैतृक संपत्ति में महिलाओं को अधिकार मिलना शुरू हुआ है। हिन्दू उत्तराधिकारी संशोधन अधिनियम 2005 के तहत बेटियों को बेटों के सामान पैतृक संपत्ति में जन्मसिद्ध बराबर का अधिकार है। और ससुराल वाले महिला के मायके की संपत्ति पर दावा नहीं कर सकते है। यह संपत्ति महिला या उसके बच्चों या माता पिता को ही मिलेगी।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से दीपा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि हिंदू कानून के अनुसार बेटियों को अपने पिता की संपत्ति में बेटो के समान ही अधिकार है। बेटियों को पिता की संपत्ति में हिस्सा मिलता है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से दीपा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि धारा 361 अनुसार यदि किसी महिला की आयु 18 वर्ष के कम है और कोई व्यक्ति उनकी अनुमति बिना उससे संपत्ति हासिल करना चाहे तो उसके लिए कानून महत्वपुर्ण होता है
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं का अधिकार भविष्य के लिए भी ज़रूरी है। लड़की जब अपने अधिकार जानती है तो वो अपनी बेटी ,बहन और पूरे समाज के लिए रास्ता बनाती है। सोचिये एक ऐसा देश जहाँ महिला बिना डर के जीती हो ,बराबरी का मौका और सम्मान मिले वही देश आगे बढ़ता है। जब कोई व्यक्ति अपने घर से शुरुआत कर महिला को अधिकार देता है तो इस छोटे कदम से पूरा देश बदलता है। देश प्रगति की ओर आगे बढ़ता है। जब देश में काम करने वाले और मज़बूत ज़्यादा होंगे तब ही देश आगे बढ़ पाएगा। महिलाओं को लोग पीछे कर के देश की आधी आबादी को काम करने से बिलकुल वंचित कर देते है जो कि बहुत गलत है। अगर समाज और देश का उद्धार करना है तो सब को मज़बूत बनाना पड़ेगा और सब को काम करना होगा
