उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिलाओं का भूमि अधिकार एक ऐसा हक है, जो कानून ने दिया है, पर समाज ने अभी तक पूरी तरह से माना नहीं हैं। अक्सर जमीन बेटे के नाम होता है,बेटी से कहा जाता है की तुम तो पराई हो।पर सवाल ये है क्या मेहनत पराई होती है, जो महिला खेत में काम करती है, फसल उगाती है, घर संभालती है। क्या उसका हक कम हो जाता है ? जब कानून बराबर का हक दे रही है तो कागजों पर बेटियों को जमीन क्यों नहीं दिया जाता है। जमीन पर हक देने का मतलब सिर्फ अधिकार देना नहीं है। बल्कि ये बताना भी है कि बेटियां घर का हिस्सा है बोझ नहीं
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 45 वर्षीय विजयपाल चौधरी कहते हैं कि महिलाओं को भी पुरुषों के समान अधिकार मिलना चाहिए। क्योंकि महिलाओं को समान अधिकार न मिलने से वो बहुत पीछे रह गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलायें अशिक्षित होने के कारण अपने अधिकारों और कानून के बारे में नहीं जान पाती हैं। इसलिए महिलाओं का शिक्षित होना बहुत जरुरी है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से सूर्यांश श्रीवास्तव कहते हैं कि महिला का अधिकार सिर्फ काम करना नहीं बल्कि इज्जत के साथ काम करना होता है। चाहे वो घर में काम करे, फैक्ट्री में फील्ड में ऑफिस में उसकी मेहनत की वैल्यु होनी चाहिए। समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिए। ये उसका अधिकार है ना की कोई सेवा। जो महिला घर संभालती है, उसका काम भी काम होता है। हम महिलाओं के काम को समझेंगे तब ही उनका अधिकार भी समझ पाएंगे उनका सम्मान कर पायेंगे।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से सूर्यांश श्रीवास्तव कहते हैं कि महिला अगर शिक्षित होगी तो उसे केवल डिग्री नहीं मिलेगी। बल्कि उसका कॉन्फिडेंस उसका फ्रीडम,अपने हक को पहचानने की ताकत। पढ़ी लिखी महिला अपने बच्चों को भी सही और गलत का फर्क सिखाती है। अगर महिला शिक्षित होगी तो वो पूरे समाज का विकास कर सकती है। आगे की जनरेशन को सीख देने वाली महिला ही होती है। इसलिए लड़की की पढ़ाई को बोझ नहीं समझना चाहिए
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से दीपा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिलाओं को आवास भूमि और संपत्ति पर समान अधिकार प्राप्त करने के लिए 30 जनवरी 2025 कार्यवाही नहीं करने पर महिलाओं के पिछड़े जने और जलवायु संबन्धी आपदाओं का अधिकार जोखिम होने का खतरा है जब महिलाओं के संपत्ति अधिकार सुरक्षित होंगे तो उन्हें अपने अधिकार को ले के पुर्ण रूप से विश्वास होगा
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 50 वर्षीय अरविन्द श्रीवास्तव कहते हैं कि बेटियों को भी पैतृक संपत्ति में हिस्सा मिलना चाहिए और यह कानून भी बनाया गया है।लेकिन इस कानून का कहाँ तक पालन किया गया है, यह विचारणीय विषय है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी लोगों को इस कानून के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अभी भी लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। लेकिन कुछ परिवारों ये पता ही नहीं है कि उन्हें बेटियों को हिस्सा देने के लिए क्या करना होगा। इस कारण बेटियां अपने अधिकार से वंचित रह जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्र में पढ़ाई लिखाई का दर्जा अभी भी बहुत ही निचले क्रम पर है। जिसके कारण लोगों को ना ही कानून का पता होता है ना ही नियमों और कार्यों का। इसलिए इस विषय पर जागरूकता बहुत ही जरुरी है
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से राहुल से हुई। राहुल कहते है कि महिलाओं को शादी के पहले जमीन पर हक मिलना चाहिए ,लेकिन अगर शादी हो जाती है, तो मायके में उन्हें कोई अधिकार नहीं मिलना चाहिए। शादी के बाद उनका पूरा हक ससुराल में ही होना चाहिए
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से मोहम्मद फरहान से हुई। मोहम्मद फरहान कहते है कि उनके पास पर्याप्त जमीन नहीं है। जिसके कारण उन्हें रोजी रोटी की समस्या होती है। इसलिए उन्हें सरकार की तरफ से जमीन चाहिए। जिस पर वो खेती कर अपना गुजर बसर आसानी से कर पायें
