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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से उम्र 44 विजय कुमार चौधरी कहते हैं कि भारत में महिलाओं को दो हज़ार पाँच हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के द्वारा पिता की संपत्ति में बेटियों को भी कानून अधिकार बन गया। विवाहित हो या अविवाहित बेटी माँ पिता की जमीन की सामान हिस्सेदार बनती है। इसके अलावा भी महिलाओं के नाम जमीन खरीदी जाती है, तो सरकार स्टाम्प में छूट देती है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से विजयपाल चौधरी कहते हैं कि पैतृिक संपति में दो हजार पांच कानून के अनुसार बेटियों को भी हक़ दिया गया है क्योंकि जन्म से ही बेटियां जमीन की सहभागीदार है और अपने माता पिता की जमीन और घर में वो अपना हिस्सा मांग सकती है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि भूमि पर महिलाओं का अधिकार होने से अनेक प्रकार के लाभ होते है। जैसे की उनका आय का स्रोत भी मिल जाता है। अगर ज़रूरत पड़ने पर उनको कोई दिक्कत है, तो जमीन के जरिए बैंक से लोन भी ले सकती हैं। वो अपना व्यवसाय शुरू कर सकती है। इससे उनका मान सम्मान बढ़ सकता है। महिलाओं के पास अगर भूमि के अधिकार है, तो परिवार में उनका मान सम्मान या कोई निणय लेने में उनको उनकी भूमिका बढ़ जाती है। भूमि का स्वामित्व उन्हें समाज में सम्मान और नई पहचान देता है। उनका आत्मविश्वास बढ़ जाता है। उनके साथ घरेलु हिंसा भी नहीं होता है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिलाओं को भूमि अधिकार मिलने से बहुत ही फायदे हो रहे हैं। इससे ना केवल उनका व्यक्तिगत जीवन सुधरता है, बल्कि पूरे समाज पर प्रभाव पड़ता है। जिसे की उनकी एक आय का श्रोत भी बनता है। भूमि अधिकार मिलने से आर्थिक सशक्तिकरण और सुरक्षा का भी आभास होता है। इससे उन्हें आर्थिक समस्याओं से कोई परेशानी नहीं होती है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि पुराने समय में महिलाओं को सिर्फ काम करने की आजादी थी। महिलाओं के नाम प्रॉपर्टी नहीं थी। समाज में उनका कोई वैल्यू नहीं था। लेकिन आज के समय में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई ऐसे नियम बनाए गए हैं। जिससे उन्हें आत्मनिर्भर और संपत्ति का मालिक बना कर समाजीकोर आर्थिक तौर पर सशक्त बनाना है सुरक्षा देना है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिला जमीन में अधिकार पाने के लिए जोखिम उठाती है। संपत्ति का दावा करने पर भाइयों और ससुराल वालों से संबन्ध खराब होते या सामाजिक बहिष्कार का रिश्क होता है। महिला अगर अपना हक़ मांगती है तो उसे घर तोड़ने वाली और लालची कहा जाता है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि विवाहित बेटी हो या अविवाहित सबको समान हिस्सा मिलेगा। महिलायें अपने अर्जित संपत्ति की एक मात्र मालिक खुद होती हैं

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार पिता की संपत्ति पर बेटी का समान अधिकार होता है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या मीडिया मानसिक स्वास्थ्य की वर्जनाओं को तोड़ने में भूमिका निभा सकता है ?