उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या मशहूर हस्तियों का मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करना मदद करता है ?

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या शहरों में मानसिक स्वास्थ्य की वर्जनायें कम हैं ?

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या महिलाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य की बात करना ज्यादा मुश्किल होता है ?

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अरविन्द श्रीवास्तव कहते हैं कि महिलायें कृषि कार्य करती तो हैं, लेकिन उनके नाम पर जमीन नहीं होने के कारण वो मजदूर वर्ग तक सीमित हो जाती हैं। जिससे उन्हें बहुत कम आय प्राप्त होती है। लेकिन अगर उनके नाम पर जमीन होगी तो वो बहुत सशक्त हो सकती हैं। महिलायें पुरुषों से अधिक मेहनत करती हैं। लेकिन जमीन अपने नाम नहीं रहने के कारण परेशान भी रहती है। सरकार भी कानून बना चुकी है कि पति की मृत्यु के बाद महिला के नाम और उसके बच्चों के नाम पर बराबर ही जमीन होगी विरासत के तौर पर। लेकिन अभी भी समस्या यह है कि महिलाओं को मालिकाना हक बेटों के द्वारा माँ को नहीं मिलता है और वो सिर्फ जमीन पर काम कर पाती हैं। उसका उपयोग अपने अनुसार नहीं कर पाती है

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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से एक श्रोता से हुई। वो कहती हैं कि उनके नाम पर जमीन है। लेकिन किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल रहा है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 45 वर्षीय विजय पाल चौधरी कहते हैं कि महिलाओं का भी पैतृक संपत्ति में पूरा अधिकार है। साल 2005 से उनका हक कानून भी बन गया है। महिला के नाम जमीन हुआ तो महिला अपना व्यवसाय भी कर सकती है। इसके लिए उन्हें सरकार की तरफ से कुछ अनुदान भी मिल जाता है। जिससे की महिलाओं को आर्थिक रूप से काफी सहायता मिलती है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिला अकेली नहीं लड़ सकती। उसके साथ परिवार समाज और सरकार का सहयोग जरूरी है। जब पति या भाई साथ देता है तब बदलाव तेज होता है। हम सभी बार बार कहते है की महिलाओं को अपनी आवाज़ उठानी चाहिए अपनी आवाज के लिए लड़ना चाहिए पर अगर वही पर उसके घर वाले उसका साथ दे। उसका पति या भाई उसका साथ दे लोग उसका साथ दे तो महिलाओं को इतनी लड़ाई करनी ही नहीं पड़ेगी। महिलाओं को उनके अधिकार आसानी से मिल पायेंगे। जो की महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण की तरफ एक मजबूत कदम होगा

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि परंपरा के नाम पर महिलाओं का हक छीन लेना गलत है। परंपरा समाज को जोड़ती है। पर अधिकार छीनने का जरिया नहीं रखती। हमारे देश में कई घरों में परंपरा के नाम पर महिलाओं को अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है। हमेशा महिला जब अपना अधिकार मांगना चाहती है, तो उसे यही कहा जाता है हमारे यहा ऐसा नहीं होता है। असल में तो हमारी परंपरा ने कभी कुछ कहा ही नहीं हमारी परंपरा ये कभी नहीं कहती की महिलाओं को अधिकार नहीं मिलना चाहिए। ये लोगों के बनाए हुए और फैलाए हुए झूठ हैं। परंपरा के नाम पर महिलाओं को हक से वंचित किया जा रहा है। इसलिए हमेशा अधिकार और परंपरा के बीच में सामंजस्य जरूरी है धन्यवाद

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि जब महिला के पास अपनी जमीन होती है, तो उसकी घरेलू हिंसा से लड़ने की ताकत भी बढ़ती है। हमारे देश में आज भी कई घर ऐसे है जहाँ पे घर में घरेलू हिंसा होती है महिलाओं को अच्छे से ट्रीट नहीं किया जाता है। पर ये बातें कभी बाहर ही नहीं आती है। महिलाएं आवाज नहीं उठा पाती है।क्योंकि कई बार उनको ऐसा लगता है की उनके पास कोई सहारा नहीं है। कोई आर्थिक सुरक्षा नहीं है।अगर उनके पास जमीन होगी तो वो अत्याचार के खिलाफ लड़ पाएंगे। उन्हें यह विश्वास होगा की अगर वो अपने पति को छोड़ भी दे तो उनके पास रहने को एक घर होगा