मीनापुर प्रखंड के खुशी सीएलएफ की सीएनआरपी बबिता कुमारी ने एसजेवाई योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दिया।

मीनापुर प्रखंड के बड़ा भर्ती पंचायत की सीएनआरपी मालती देवी ने बच्चों के पूरक आहार के बारे में विस्तार से जानकारी दिया।

मुज़फ़्फ़रपुर । 8 जुलाई : कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों ने कई आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित किया है। सरकार इस चुनौती का मुकाबला करते हुए धीरे-धीरे जरुरी स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल करने की दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय रक्त संचार परिषद, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ब्लड ट्रांसफ्यूज़न सेवाओं को लेकर दिशानिर्देश जारी किया गया है।कोविड-19 महामारी के दौर में राष्ट्रीय रक्त संचार परिषद द्वारा जारी किया गया यह दूसरा दिशानिर्देश है। ब्लड ट्रांसफ्यूज़न सेवाओं को लेकर पहला दिशानिर्देश 25 मार्च को ही जारी किया गया था। कोविड-19 के नए साक्ष्यों एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रदान किये गए इनपुट के मद्देनजर राष्ट्रीय रक्त संचार परिषद ने ब्लड ट्रांसफ्यूज़न सेवाओं को लेकर दूसरा दिशानिर्देश जारी किया है। साथ ही कोरोना महामारी के बढ़ते प्रसार को ध्यान में रखते हुए सभी राज्यों के एड्स कण्ट्रोल सोसाइटीज एवं स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूज़न काउंसिल को दिशानिर्देशों के अनुपालन करते हुए ब्लड सेंटर में खून की उपलबध्ता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो सुनें।

मुज़फ़्फ़रपुर / 8 जुलाई: विगत 4 महीनों से लोगों के मन में कोरोना को लेकर असुरक्षा की भावना में अधिक बढ़ोतरी हुयी है। ऐसा नहीं है कि पहले कोई महामारी नहीं थी। प्लेग, हैजा,स्पेनिश फ्लू, एशियाई फ्लू, सार्स (SARS), मर्स (MERS) एवं इ-बोला (Ebola) जैसी महामारी ने पूर्व में भी वैश्विक स्तर पर लोगों को प्रभावित किया है। लेकिन कोविड-19 की महामारी बिल्कुल अलग पैमाने पर है। इसने पूरी दुनिया में दहशत पैदा कर दी है। वैश्विक स्तर पर निरंतर किये जा रहे प्रयासों के बाद भी कोविड-19 का सटीक उपचार उपलब्ध नहीं होने से लोगों के मन में निरंतर डर की भावना बढ़ रही है, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य गंभीर रूप से बाधित हो रहा है। इसको लेकर मानसिक स्वास्थ्य पर कार्य करने वाली संस्था निमहांस( नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज, बैंगलोर) ने कोरोना संक्रमण काल में लोगों के बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने की दिशा में समुदाय के सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए मार्गदर्शिका जारी की है। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो सुनें।

चमकी बुखार और कोरोना संक्रमण दोनों के खतरे से समाज को कर रहीं आगाह - कम्युनिटी मोबलाइजर शमीमा और समूह की जीविका दीदियां फैला रहीं जागरूकता मोतिहारी । 7 जुलाई : समुदाय में जागरूकता फैलाने की बागडोर जब महिलाओं के हाथों में होती है, तो वे कामयाबी की बड़ी लकीर खींच देती हैं। इसमें सेवा, समर्पण और जीवटता की ताकत होती है। तुरकौलिया प्रखंड में कार्यरत कम्युनिटी मोबलाइजर शमीमा खातून और उनकी टीम की जीविका दीदियां दोहरे मोर्चे पर लड़ रही हैं। एक तरफ कोरोना तो दूसरी ओर चमकी बुखार से समुदाय को बचाने की अनवरत मुहिम जारी है। जागरूकता के इन साझा प्रयासों ने गांव की इन आम महिलाओं को आज खास बना दिया है। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो सुनें।

- पांच अतिप्रभावित गांवों पर दिया गया जोर - पिछले वर्ष एईएस के आए थे 6 केस, इस वर्ष मात्र 1 - प्रभवित बच्चे का आरबीएसके के डॉक्टर कर रहे फॉलोअप मुजफ्फरपुर। 4 जुलाई : चमकी को हराने के लिए साहेबगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ने जो किया है, वह सराहणीय और अद्भुत है। वर्ष 2019 में इस प्रखंड के 6 बच्चे एईएस से प्रभावित हुए थे, पर इस वर्ष मात्र एक बच्चा ही इससे प्रभावित हो पाया। साहेबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की इस सफलता का श्रेय वहां के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ ओम प्रकाश जागरुकता को देते हैं। वह कहते हैं कि विभिन्न विभागों, स्वास्थ्यकर्मियों और जन प्रतिनिधियों की बदौलत ही यह संभव हो पाया है। वहीं जागरुकता के साथ तकनीकी पक्ष में केयर के अधिकारियों का भी अहम रोल रहा है। इसे रोकने के लिए तीन स्तर फैसिलीटी, जागरुकता, क्षमतावर्धन पर कार्य किया गया। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो सुनें।

माँ की चमकी पर जानकारी ने बचायी गोलू की जान •गोलू की मां को पहले से थी चमकी की जानकारी •लक्षण पहचानते ही पहुंचाया अस्पताल मुजफ्फरपुर। 04 जुलाई : किसी बच्चे के लिए पहली पाठशाला उसकी माँ होती है। माँ के पास पास सटीक जानकारी हो तो वह अपने बच्चे के स्वास्थ्य और भविष्य दोनों को बना सकती है। ऐसी ही एक माँ हैं कांटी प्रखंड के विजय छपरा की रिंकू देवी। रिंकू देवी ने अपनी जानकारी की बदौलत अपने बच्चे गोलू को चमकी के मुंह से खींच लायी। 14 अप्रैल को दिन में दो बजे गोलू बाहर कहीं से खेल कर अपने आंगन में आया। तभी वह अचानक पसीने से तर-बतर हो गया। तुरंत ही सांस फूलने लगा और शरीर में ऐंठन शुरु हो गयी. यह देखते ही रिंकू देवी समझ गयी कि उनके बेटे को चमकी का अटैक आया है। बिना देरी की वह बगल से ऑटो किराए पर लिया और एक घंटे के अंदर एसकेएमसी हॉस्पिटल पहुंच गयी। जांच में पता चला कि गोलू चमकी बुखार से पीड़ित है. छह दिन एसकेएमसी हॉस्पिटल में ईलाज होने के बाद गोलू स्वस्थ होकर अपने घर आ गया।

राज्य सरकार ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण की बढ़ती संख्या को देखते हुए सभी लोगों को मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। अब कोई भी बिना मास्क पाकर जाएगा तो उसे पचास रुपये का जुर्माना भरना होगा।

बिहार राज्य के जिला मुजफ्फरपुर से जुल्फिकार मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि जागरूकता अमूमन कई समस्यों से निदान का रास्ता साबित होता है. कुढ़नी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ने भी एईएस(एक्यूट इन्सेफ़लाईटिस सिंड्रोम) के लिए इसी जागरुकता को अपना हथियार बनाया। नतीजा यह हुआ कि इस वर्ष मात्र 3 बच्चे ही कुढनी प्रखंड में एईएस से पीड़ित हुए। उन बच्चों के अभिभावकों ने भी जागरुक रह कर ही बच्चों को सही समय पर अस्पताल पहुंचाया, जिससे उनकी जान बच सकी. समुदाय को एईएस पर जागरूक करने में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ कई विभागों ने कोरोना संक्रमण काल में भी सराहनीय कार्य किया है

बिहार राज्य के जिला मुजफ्फरपुर से रंजन मोबाइल वाणी के माध्यम से जानकारी दे रहे है कि गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान अपने सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. इससे न केवल उनका बल्कि उनके गर्भस्थ शिशु भी असर पड़ता है. इसलिए हर गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान अपने स्वास्थ्य का विशेष रूप से खयाल रखना जरूरी है.