मुजफ्फरपुर : चमकी बुखार की रोकथाम में जीविका दीदियों का जागरूकता अभियान भी मील का पत्थर साबित हो रहा है। जीविका की कम्युनिटी मोबलाइजर शोभा कुमारी ने चार बिंदुओं को चमकी बुखार के खिलाफ हथियार बनाया है। रोग को पहचानने में ना हो देरी, बचाव में ना हो देरी, पहुंचाने में ना हो देरी और बच्चों को सही पोषण मिले, इन चार बातों को जिस तरह से मूल मंत्र के रूप में उनके समूह की महिलाओं के द्वारा लोगों के बीच प्रचारित किया गया, वह आज बड़े बदलाव का सूत्रधार बना है। इस मुहिम में शोभा कुमारी की रणनीति और नेतृत्व क्षमता उल्लेखनीय है। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो क्लिक कर सुनें।
मुजफ्फरपुर। 17 जुलाई : मुजफ्फरपुर जिले में नीति आयोग के द्वारा “सुरक्षित दादा-दादी, नाना-नानी” अभियान के तहत लोगों को जागरूक किया जा रहा है।इसके लिये आईसीडीएस डीपीओ को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है।उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत खास कर बुजुर्गों को जिनकी उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है उन्हें कोरोनावायरस से संबंधित सभी जानकारी और संभावित मदद दी जा रही है। मालूम हो कि नीति आयोग ने कोविड-19 के दौरान वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए एक अभियान शुरू किया है जिसका नाम दादा दादा- दादी ,नाना -नानी अभियान रखा गया। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो क्लिक कर सुनें।
मुजफ्फरपुर। 17 जुलाई : जिले में स्थित कोविड केयर सेंटर में मौजूदा स्थितियों और सुविधाओं का जायजा लेने स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक अंजनी कुमार शुक्रवार को मुजफ्फरपुर पहुंचे। उन्होंने जिले में स्थित तीन कोविड केयर सेंटर एसकेएमसीएच, तुर्की और सदर स्थित का जायजा लिया। जहां उन्होंने सेंटर में खाने पीने से लेकर चिकित्सा की मूलभूत सुविधाओं के बारे में जाना। उन्होंने वहां दी जा सुविधाओं पर संतोष जताया. साथ ही मरीजों में हो रही बढ़ोतरी को लेकर बेड की संख्या भी बढ़ाने का निर्देश दिया। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो क्लिक कर सुनें।
मुजफ्फरपुर। 17 जुलाई : कोरोना संक्रमण ने लोगों की कार्यशैली को बदल कर रख दिया गया है। संक्रमण के आक्रामक रवैये को देखते हुए लोगों ने घरों से काम करना ही उचित समझा। इन सब के बीच कुछ लोग एसे भी थे जिनकी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं दिखा वरन उन्होंने काम के प्रति अपनी चपलता को और बढ़ा दिया। पहले से ज्यादा लोगों से मिलना, कोरोना से बचने के लिए लोगों को सुझाव देना, प्रवासियों को खोज कर उन्हें आइसोलेशन तक ले जाना जैसे महत्वपूर्ण काम किया। तभी तो उन्हें स्वास्थ्य का प्रथम सिपाही कहा जाता है। ऐसी ही एक स्वास्थ्य की सिपाही का नाम है सुनीता। वह जिले के पश्चिमी सेरुकाही में कार्यरत हैं जो आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 93 और वार्ड संख्या 15 में आता है। 2005 से सुनीता आशा के रुप में कार्यरत हैं।अधिक जानकारी ऑडियो सुनें।
बिहार राज्य के मुजफरपुर जिला से मोबाइल वाणी के माध्यम से स्वास्थ्य पर रंजन कुमार जानकारी देते हुए बता रहे है कि अभी पूरा स्वास्थ्य बिभाग कोविड-19 के महामारी से हर पल जंग कर रहा है ताकि इस संक्रमण से बचा जा सके. पर क्या हम ये जानते हैं कि पूरी तरह से स्वस्थ्य बच्चा ही बीमारियों से लड़ने में सक्षम होता है। कुपोषण सिर्फ शरीर को कमजोर ही नहीं करता बल्कि अन्य बीमारियों से होने वाले प्रभावों में भी वृद्धि करता है. बच्चों में होने वाले दिमागी बुखार ऐसे तो मच्छर द्वारा काटने से होता है, लेकिन कुपोषित बच्चों में होने वाले दिमागी बुखार एक स्वस्थ बच्चे में होने वाले दिमागी बुखार की तुलना में अधिक गंभीर एवं जानलेवा साबित हो सकता है.
मोतीपुर प्रखंड के मिशाल सीएलएफ कार्यरत सीएफ पंकज ठाकुर ने अपने कार्य के बारे में विस्तार से बताया।
मुजफ्फरपुर । 16 जुलाई : कोरोना संक्रमण धीरे -धीरे हरेक वर्ग को अपनी जद में ले रहा है। वहीं एक बार फिर लॉकडाउन ने लोगों को मानसिक रुप से भी प्रभावित किया है। इस संक्रमण काल में स्वास्थ्यकर्मी दिन -रात अपनी सेवा देने में जुटे हैं। जब तक इस वायरस से प्रतिरक्षण के लिए उपर्युक्त टीके नहीं विकसीत होते हैं, तब तक सरकार और डब्ल्यूएचओ के बताए मार्गदर्शिका का अनुपालन कर हम मुश्किल परिस्थितियों से निकल सकते हैं। हमें जरुरत है थोड़ी सी सजगता और मानसिक रुप से स्वस्थ्य रहने की। ऑडियो क्लिक कर हर प्रकार की छोटी बड़ी खबरें सुनें।
चमकी बुखार के खतरे से लोगों को करती हैं आगाह, बताती हैं बचाव के तरीके - शुरुआती दिनों में उनके काम का जिन्होंने उड़ाया था मजाक, आज कर रहे तारीफ मुजफ्फरपुर। 16 जुलाई : बहुत कम लोग होते हैं, जो अपने नाम के अनुरूप काम भी करते हैं। चमकी बुखार पर जागरूकता फैलाने में गायघाट की जमालपुर पंचायत के राघोपुर वार्ड नंबर 12 की आशा किरण देवी ने अपने नाम को सच साबित कर दिया है। अपने प्रयासों से कई घरों का चिराग बुझने से बचा लिया। 60 वर्षीया सकीना और 65 वर्षीया शैल देवी ने बताया कि आशा उनके इलाके के लोगों के लिए उम्मीद की किरण है। ऑडियो क्लिक कर हर प्रकार की छोटी बड़ी खबर सुनें।
बिहार राज्य के जिला मुजफ्फरपुर से जुल्फिकार मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि एक अध्ययन के बाद पाया कि कोरोना से बचाव का तरीका इस प्रकार है अधिक जानकारी के लिए ऑडियो क्लिक करें।
बिहार राज्य के जिला मुजफ्फरपुर से रंजन कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि कोरोना काल में अस्थमा के मरीज को सतर्क रहने की जरूरत है. अस्थमा के रोगी अगर सावधान नहीं रहे तो कोरोना की चपेट में आ सकते हैं. ऊपर से बरसात का मौसम भी शुरू हो चुका है. ऐसे में अस्थमा के रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि ऐसे समय में अस्थमा के अटैक की आशंका बढ़ जाती है. थोड़ी से सावधानी बरतकर इसका मुकाबला किया जा सकता है। इस मौसम में बढ़ी हई उमस के कारण फंगस में बढ़ोत्तरी हो जाती है. इससे अस्थमा के अटैक की आशंका बढ़ती है. बारिश के कारण वायु प्रदूषण में बढ़ोत्तरी हो जाती है तो अस्थमा के रोगियों के लिए नुकसानदेह है. साथ ही मानसून के कुछ वायरल इंफेक्शन भी बढ़ जाते है. इससे भी अस्थमा की समस्या बढ़ती है
