कहानियां सुना कर चमकी बुखार को दूर भगा रहीं : डॉ. सुरभि मुज़फ़्फ़रपुर : ऐसे पिछड़े टोले मुहल्ले जहां लोगों के सोने के कमरे के इर्द गिर्द ही मवेशी बांधे जाते हों, साफ सफाई के प्रति जागरूकता न हो, वहां स्वच्छता और बच्चों के पोषण के बारे में समझना आसान काम नही होता। आरबीएसके बोंचहा प्रखंड की चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुरभि ने चमकी बुखार के प्रति जागरूकता फैलाने के अभियान में जब परेशानियों का सामना किया तो प्रयोगधर्मिता का सहारा लिया। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो सुनें। अगर आप साधारण फोन उपयोगकर्ता हैं तो मोबाइल वाणी के टॉल फ्री नंबर 8800458666 पर भी सुनें।
बिहार राज्य के जिला मुजफ्फरपुर से जुल्फिकार मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि 1 जुलाई से राज्य में एईएस(एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) व जेई(जापानी इंसेफलाइटिस) की रोकथाम के मद्देनजर लोगों को निशुल्क: 102 एंबुलेंस की सुविधाएं दी जा रही है। राज्य स्वास्थ्य समिति ने प्रभावित रोगियों को एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराने को लेकर सभी सिविल सर्जन, जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक को अपनी निगरानी में इस हालात पर नजर रखने के लिए भी कहा है। 11 जिलों में कुल 406, मुजफ्फरपुर में 102 एंबुलेंस उपलब्ध है। राज्य के 11 सबसे अधिक एईएस व जेई से प्रभावित जिलों में रोगियों को कई सुविधाएं के साथ एंबुलेंस सेवा भी दी जा रही है.
बिहार राज्य के जिला मुजफ्फरपुर से जुल्फिकार मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि कोरोना संक्रमण को लेकर बहुत एहतियात बरते जाने की जरूरत है। सावधानी से जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन कर इसकी रोकथाम की जा सकती है। कोविड 19 संक्रमण के मामलों में लगातार इजाफा हुआ है। कई जगहों में लोग नियमों की अनदेखी कर रहें हैं जो पूरे समुदाय के लिए खतरा है। इसको लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, ने कोरोना से बचाव के लिए गाइडलाइन की है, जिसमें कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए 15 विशेष वचनों या प्रतिज्ञाओं के पालन करने की अपील की गयी है। कोविड 19 को लेकर होने वाली चिंताएं या मानसिक दबाव के लिए 08046110007 फ्री हेल्पलाइन नंबर पर बात कर मनोचिकित्सक से आवश्यक लें।
चमकी पर चर्चा ने बचायी एईएस से प्रियांश की जान • दो बार एईएस से प्रभावित हो चुका है प्रियांश • जागरुक पिता ने तुरंत अस्पताल पहुंचा बचायी प्रियांश की जान मुजफ्फरपुर। 29 जून: किसी भी विषय पर जब खुल कर चर्चा हो तो उसमें शामिल हरेक व्यक्ति कुछ ज्ञान तो लेकर ही जाता है। ऐसा ही कुछ कुढ़नी प्रखंड में पछुवन गांव के सतीश कुमार सागर के साथ हुआ। सतीश ने बताया कि 16 मई को ही गांव में पीएचसी से डॉक्टर साहब ने चमकी पर चर्चा की थी। उस चर्चा में चमकी को पहचानने से लेकर प्राथमिक तौर पर निपटने के बारे में भी बताया। वह भी उस चर्चा में शामिल थे. शामिल डॉक्टर साहब की बातों को उन्होंने ध्यान से सुना। नतीजा है कि चर्चा में शामिल बातों को अमल में लाकर ही वह अपने बेटे को एईएस के व्यूह से बाहर निकाल सके। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो सुनें।
बिहार राज्य के जिला मुजफ्फरपुर से रंजन कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से जानकारी दे रहे है कि जिले में मानसून प्रवेश कर चुका है. इस मौसम में किसी भी समय बारिश का होने के साथ ही बिजली कड़कने या वज्रपात की संभावना बनी रहती है. इसलिए ऐसे समय में लोगों को अपने बचाव के लिए सजग रहना बहुत जरुरी है. बारिश के दौरान बिजली के कड़कने से घर से बाहर उपस्थित लोग इसके चपेट में आ सकते हैं और इससे लोगों की जान तक जा सकती है. इसलिए ऐसे समय में जितना हो सके बारिश के दौरान बाहर निकलने से बचें. अगर आप बारिश के दौरान घर से बाहर हैं तो बिजली कड़कने से पूर्व सुरक्षित जगह पर जरूर पहुंचने का प्रयास करें
मुज़फ्फरपुर जिले के कांति प्रखण्ड की सीएम सर्मीला देवी द्वारा बताया गया चमकी बुखार के लक्षण और इसके निदान।जिससे हम अपने बच्चों को चमकी बुखार जैसे बीमारी से किस प्रकार रोक सकते है।
मुजफ्फरपुर जिले के कांति प्रखण्ड की सीएम सीमा देवी द्वारा बताया गया चमकी बुखार से हम अपने बच्चों को किस प्रकार सुरक्षित रखें।
मुजफ्फरपुर जिले के कांति प्रखण्ड के सीएम सोनी देवी ने बताया कि मोबाईल वाणी के माध्यम से इन्होंने चमकी बुखार में क्या - क्या जाना।
मुसहरी प्रखंड कन्हौली पंचायत के रूपा ग्राम संगठन की CM रंजना सिन्हा बतला रही है कि चमकी बुखार के लक्षण, उपाय और बचाव की सही जानकारी जरूरी है और जीविका मोबाइल पर ये सभी जानकारियों के अलावा भी अन्य जानकारियां मिलती है वहीं इस पर हम अपनी राय, विचार, सुझाव और सवाल भी पूछ सकते है।
लॉकडाउन में भी प्रभारी ने अस्पताल में कैम्प कर सम्भाला एईएस को - एचएससी व एपीएचसी बंद रहने के बाद भी आशा की सक्रीयता ने बच्चों की बचाई जान - पीएचसी का स्पेशल वार्ड व तीन ऐम्बुलेंस दिन - रात दिन करता रहा काम मुजफ्फरपुर। 26 जून : मड़वन का मनेजमेंट इस बार कई मायनों में अलग रहा जिससे एईएस का केस यहां अभी तक नहीं है। कोरोना माहामारी को लेकर लॉक डाउन में भी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने अस्पताल में ही कैम्प कर एईएस को सम्भाल लिया। बताया जाता है कि पिछले साल जब कभी एईएस का केस आता था तो प्राथमिक उपचार के बाद वह रेफर हो जाता था, पर लॉक डाउन के कारण कोविड में सारा छुट्टी रद्द रहने से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. के. डी रजक अस्पताल के सामने ही डेरा ले लिया। रात्रि में भी एईएस को लेकर अस्पताल में ही सोते थे। जैसे ही कोई केस आता था कि एलर्ट होकर पहले अपनी उपस्थिति में हीमोग्लोबीन लेवल देखते ही चिकित्सा शुरू कर देतें। ऐसे में सौ में नब्बे फिसदी केस को स्वयं ही मेहनत कर क्योर कर दिया। इस बार यह भी देखने को मिला कि लॉक डाउन में एचएससी व एपीएचसी बंद रहने के बाद भी आशा की सक्रीयता ज्यादा रही। प्रभारी के 24 घंटा अस्पताल पर रहने से पीएचसी का स्पेशल वार्ड व तीन ऐम्बुलेंस दिन - रात कार्य करता रहा।
