दिल्ली एनसीआर श्रमिक वाणी का माध्यम से मोहम्मद शाहनवाज की बातचीत फातिमा से हुई फातिमा बताती हैं मेरे हस्बैंड 2 साल से मुझे छोड़कर कहीं चले गए हैं जिसकी वजह से मेरी पेंशन भी नहीं बन रही है मैं घर घर जाकर लोगों के बर्तन साफ करती हूं और तभी मेरा खर्चा चल पा रहा है मैं बहुत परेशान हूं मगर मेरी मदद कोई नहीं कर पता है