दिल्ली एनसीआर श्रमिक वाणी के माध्यम से मोहम्मद शाहनवाज की बातचीत जीनत से हुई जीनत बताती हैं कि मैं विधवा महिला हूं मेरे हस्बैंड को मरे हुए लगभग 20 साल बीत चुके हैं मेरे हस्बैंड की डेथ बिहार में हुई थी जो कि मुझे नहीं पता लगा क्योंकि मैं अपनी लड़कियों के साथ दिल्ली रहती थी मेरे हस्बैंड बिहार में बीमार रहते थे मुझे जब पता लगा कि उनकी डेथ हो गई है तो मैं 2 साल बाद बिहार पहुंची हमारे यहां पर कब्रिस्तान की पर्ची भी नहीं मिलती है जिसकी वजह से डेथ सर्टिफिकेट नहीं बन पाया ग्राम प्रधान की मेरे पास एक लेटर है जिससे मेरी पेंशन नहीं बन रही है चार मेरी लड़कियां हैं₹6000 महीने पर कारखाने में पैकिंग का काम करती हूं खर्चा भी पूरा नहीं होता है किराए का कमरा है बहुत ज्यादा परेशान हूं