दिल्ली एनसीआर श्रमिक वाणी के माध्यम से रीना परवीन की बातचीत फलक से हुई फलक बताती हे मेरा नाम फलक है मैं पहले घर में कढ़ाई का काम करती थी मगर अब काम नहीं मिल रहा है कारखानों में भी काम नहीं है मेरे पापा मजदूरी का काम करते हैं उनके कारखाने में काम नहीं है मेरी मम्मी और मैं पहले ₹100 रोज का काम करते थे कढ़ाई का अब सात आठ महीने से कढ़ाई का काम नहीं मिल रहा है कई बार हमने कारखाने वालों से कहा तो कहते हैं कि आप काम नहीं आ रहा है बहुत मंदा है घर का खर्च चलाना बहुत मुश्किल हो चुका है
