हवेली खरगपुर के मजदूर राजेंद्र सिंह साथ में उनका राजीव कुमार नीलेश पटेल पप्पू सुनील संतोष इत्यादि बैठे हुए थे उनसे जब बात की तो उन्होंने दूसरे प्रदेश में बिहार के मजदूरों के साथ किस प्रकार का भेदभाव किया जाता है उन्होंने अपने साथ हुए भेदभाव के बारे में विस्तृत रूप से बताया अगर वहां पर रोजगार नहीं मिलता है अगर वह घर चले आते हैं गांव तो बच्चे का पालन पोषण के लिए नरेगा में कम करते हैं नरेगा में भी हमेशा काम नहीं मिलने से घर का चिंता हमेशा बना रहता है अगर काम भी मिल जाए तो पैसा सही समय पर नहीं मिलता है जिसके कारण से मजदूरी के लिए इधर उधर जाना पड़ता है मैं मुंगेर की आवाज से लक्ष्मण कुमार सिंह

इन दिनों देश में जो हालात हैं वो किसी से छिपे हुए नहीं है. हर जगह धरना प्रदर्शन हो रहे हैं, आंदोलन हो रहे हैं. लोगों का गुस्सा उबाल मार रहा है. सरकार के खिलाफ जन आक्रोश वाकई परेशान कर देने वाला है.लेकिन इन सबके पीछे दबाया जा रहा है देश में मंदी का मुद्दा.इस बार जनता ने हमें बताया कि कैसे मंदी के कारण ग्रामीण विकास के काम अटके हुए हैं और उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.ऑडियो पर क्लिक कर सुनें श्रोताओं की प्रतिक्रियाएँ।

मंदी के मकड़जाल में फंसने वालों में केवल शहरी युवा ही नहीं हैं बल्कि ग्रामीण युवा भी हैं. जिन्हें उम्मीद थी कि गांव में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और उन्हें अपने घरों से दूर कभी नहीं जाना होगा... आखिर क्या हुआ उन लोगों के साथ? आखिर क्या होना उन लोगों का कल? आखिर क्यों रूका है ग्रामीण विकास? क्या आप जानते हैं.....!