धरहरा प्रखंड कार्यालय में पानी के लिए सिर्फ टयूब नाल की व्यवस्था है ,जिससे पानी 10 बजे तक पानी उबाल हो जाता है ,जिससे पानी पीना दुर्लभ हो जाता है नल की कोई व्यवस्था नही जिससे पानी पीने की बड़ा कदम उठाना अनिवार्य है
बिहार राज्य मुंगेर जिले से राजीव कुमार जी ने मुंगेर की आवाज के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया की जमालपुर प्रखंड के श्याम वाटिका में नेशनल जनरल लिस्ट एसोसिएशन का प्रथम वार्षिक सम्मेलन आयोजित की गई. इस वार्षिक सम्मेलन का मंच संचालन जिला अध्यक्ष लाल मोहन महाराज एवं संचालन प्रमंडलीय महासचिव सुनील कुमार गुप्ता ने किया। इस सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि प्रदेश संरक्षक विजय आनंद दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ प्रशांत प्रदेश अध्यक्ष अशोक ठाकुर तथा अध्यक्ष रंजीत कुमार विद्यार्थी थे प्रशांत कुमार को एनजीए में प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर ने अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया अपने संबोधन में कहा कि नेशनल एसोसिएशन से जिले में पत्रकार के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है. संगठन को मजबूती प्रदान करने के लिए प्रत्येक माह बैठक करने का सुझाव उन्होंने दिया इसके साथ ही पत्रकारों की कार्यशाला आयोजित करने का सुझाव दिया बैठक में सर्वसम्मति से मुंगेर के वरिष्ठ पत्रकार काशी प्रसाद की जयंती पुण्यतिथि तथा भव्य सम्मान समारोह मनाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही संगठन के क्रियाकलापों उपलब्धियों एवं पत्रकार की ज्वलंत समस्याओं को उत्कृष्ट करने के लिए मासिक पत्रिका प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया। बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश संरक्षक विजय आनंद ने कहा कि पत्रकारों के हित में हमेशा संगठन सक्रिय रहेगा प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर ने कहा कि पत्रकार देश व समाज को नई दिशा देने का काम करते हैं पत्रकार को कोई कमजोर नहीं समझे पत्रकारों को प्रशासन हर हाल में सुरक्षा उपलब्ध कराएं प्रमंडलीय अध्यक्ष रंजीत कुमार विद्यार्थी ने कहा कि पत्रकारों के हर सुख दुख में हम सभी साथी साथ रहेंगे उन्होंने कहा कि पत्रकारों को आज एकजुट होकर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर अत्याचार करने वाले के विरुद्ध गोल बंद होने की जरूरत है। नवीन झा ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि एनजे की विशेषता है कि सभी सदस्य एक दूसरे के परेशानी में एक साथ खड़े होते हैं इस विशेषता के कारण ही जिला में हमारी अलग पहचान है वार्षिक सम्मेलन में संगठन का विस्तार करते हुए जमालपुर नगर अध्यक्ष के पद पर प्रिंस दिलखुश को प्रमंडलीय प्रवक्ता के रूप में गौरव मिश्रा जिला विधि सलाहकार के रूप में ओमप्रकाश पौधा का उन्होंने सर्वसम्मति से किया गया बैठक में कार्यकारी जिला अध्यक्ष संजय राजा को भी मनोनीत किया गया. बैठक में धनराज सुनील जख्मी शशिकांत सुमन मधुसूदन सुरेश कुमार पुनीत सिंह त्रिभुवन चौधरी इम्तियाज आलम साकेत कुमार राजीव कुमार ठाकुर मोहम्मद शेख मोहम्मद हैदर अली दीपक बीपी अविनाश कुमार मनोज पटेल सहित दर्जनों सदस्य उपस्थित थे।
बिहार राज्य के मुंगेर जिले से विपिन कुमार जी ने मोबाईल वाणी के माध्यम से जानकारी देते हुये बताया कि सरकार के द्वारा भले ही पूरे प्रदेश में पॉलिथीन के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया हो लेकिन मुंगेर शहर के बाजारों में आज भी खुलेआम पॉलिथीन का उपयोग दुकानदारों और लोगों के द्वारा किया जा रहा है ।स्थिति यह है कि अब तो मुंगेर शहर में पॉलिथीन का सप्लाई करने वाले व्यापारी छोटे दुकानदारों को प्रतिबंध का डर बताकर और अधिक कीमत पर पॉलिथीन बेच रहे है ।
बिहार के जिला मुंगेर से रंजन मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि इस भीषण गर्मी में ज्यों ज्यों पारा बढ़ता जा रहा है त्यों त्यों बिहार में जल संकट भी गहराने लगा है। बिहार के जिन पांच जिलों में जल संकट एक गंभीर समस्या का रूप ले रहा है वह है वैशाली, जमुई, नवादा, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर राज्य के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जल संकट की जानकारी ली। इस 2 घंटे चले वीसी में सभी जिलों के डीएम को जल संकट से निपटने के लिए टैंकर की संख्या बढ़ाने और आवश्यकतानुसार चापाकल लगाने का निर्देश दिया गया है। मुख्य सचिव ने डीएम को हर हाल में किसी को भी पानी की समस्या से निजात दिलाने की हिदायत दी है। बताते चलें कि बिहार के कई जिलों में गर्मी आते ही हर साल जल संकट की स्थिति पैदा होती है, जिसका सीधा असर पेयजल के साथ साथ सिंचाई व्यवस्था तक पर पड़ती है।
बिहार राज्य के जिला मुंगेर से रंजन मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि बदलते मौसम में डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. डायरिया के कारण बच्चों में अत्यधिक निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) होने से समस्याएं बढ़ जाती है एवं कुशल प्रबंधन के आभाव में यह जानलेवा भी हो जाता है. शिशु मृत्यु दर के कारणों में डायरिया भी एक प्रमुख कारण है. इसके लिए डायरिया के लक्ष्णों के प्रति सतर्कता एवं सही समय पर उचित प्रबंधन प्रदान कर बच्चों को डायरिया जैसे गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बच्चों में 24 घंटे के दौरान तीन या उससे अधिक बार पानी जैसा दस्त आना डायरिया है. लेकिन यदि तीन या इससे अधिक बार पतले दस्त की जगह सामान्य दस्त हो तो उसे डायरिया नहीं समझा जाता है . डायरिया मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं. पहला एक्यूट वाटरी डायरिया जिसमें दस्त काफ़ी पतला होता है एवं यह कुछ घंटों या कुछ दिनों तक ही होता है. इससे निर्जलीकरण(डिहाइड्रेशन) एवं अचानक वजन में गिरावट होने का ख़तरा बढ़ जाता है. दूसरा एक्यूट ब्लडी डायरिया जिसे शूल के नाम से भी जाना जाता है. इससे आंत में संक्रमण एवं कुपोषण का खतरा बढ़ जाता है. तीसरा परसिस्टेंट डायरिया जो 14 दिन या इससे अधिक समय तक रहता है. इसके कारण बच्चों में कुपोषण एवं गैर-आंत के संक्रमण फ़ैलने की संभावना बढ़ जाती है. चौथा अति कुपोषित बच्चों में होने वाला डायरिया होता है जो गंभीर डायरिया की श्रेणी में आता है. इससे व्यवस्थित संक्रमण, निर्जलीकरण, ह्रदय संबंधित समस्या, विटामिन एवं जरुरी खनिज लवण की कमी हो जाती है. इन लक्ष्णों का माताएं रखें ध्यान: डायरिया के शुरूआती लक्ष्णों का ध्यान रख माताएं इसकी आसानी से पहचान कर सकती हैं.
बिहार राज्य के मुंगेर जिले से राजीव कुमार जी ने मुंगेर की आवाज के माध्यम से डॉक्टर राजेश चंद्र वर्मा जी से हुई बातचीत को साझा किया। राजीव कुमार जी ने जानकारी देते हुए बताया कि लिवर खराब है उसे आप कैसे जानेंगे डॉक्टर वर्मा ने बताया कि लिवर एक इंपॉर्टेंट ऑर्गन है हमारे शरीर का, हमारे शरीर के लिए क्यों जरूरी है साथ ही उन्होंने कुछ सिम्टम्स भी बताया कि हम लोग कैसे समझ पाएंगे कि हमारा लीवर स्वस्थ है या बीमार सबसे पहली उपयोगिता उन्होंने बताया कि हमारे शरीर में 30% ब्लड सप्लाई हमें लीवर से मिलता है. जो खास बात है हम लोगों में भी खाने का आदत है. वह सारी चीजों को बचाने का काम करता है बाइल जूस बनता है। यह जो को बचाने में मदद करता है उन्होंने हमारे शरीर को ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में काम करती है हम लोगों के शरीर में जो भी चीजें हैं उसे बाहर निकालने का काम करता है लीवर से जुड़ी कुछ बताया जिससे आमजन को यह पता चल सके कि उनकी स्थिति में है या नहीं उन्होंने बताया कि बिना खास कारण के पेट में दर्द होना अक्सर जी मिचलाना और यह शिकायतें बार-बार होती है। अक्सर भूख का कम लगना या सही समय पर भूख ना लगना लिवर खराब की स्थिति में यूरिन का रंग गहरा हो जाना बिना बिना खास कारण है थकान लगना आंखों का पीलापन हो या चेहरे का रंग पीला पड़ जाना जैसे जॉन्डिस की केस में देखने को मिलता है अगर जिस किसी में लिवर प्रॉब्लम होता है तो उसका मुंह का स्वाद खराब हो जाता है और साथ है मुंह से बदबू आती है क्योंकि लीवर की खराब स्थिति में अमोनिया का फॉरमेशन अधिक होता है और अधिक अमोनिया की वजह से बदबू आती है। जिस किसी में अगर लीवर की शिकायत होती है जो पेट का निचला हिस्सा है वह अक्सर दर्द की शिकायत मिलती है वह भी लिवर खराब होने की तरफ इशारा करती है.
Transcript Unavailable.
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बिहार राज्य के जिला मुंगेर से रंजन मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि आधारभूत पंचतत्वों में से एक जल हमारे जीवन का आधार है। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। इसलिये कवि रहीम ने कहा है- ‘‘रहिमन पानी राखिये बिना पानी सब सून,पानी गये न उबरै मोती मानुष चून।’’ यदि जल न होता तो सृष्टि का निर्माण सम्भव न होता। यही कारण है कि यह एक ऐसा प्राकृतिक संसाधन है जिसका कोई मोल नहीं है जीवन के लिये जल की महत्ता को इसी से समझा जा सकता है कि बड़ी-बड़ी सभ्यताएँ नदियों के तट पर ही विकसित हुई और अधिकांश प्राचीन नगर नदियों के तट पर ही बसे। जल की उपादेयता को ध्यान में रखकर यह अत्यन्त आवश्यक है कि हम न सिर्फ जल का संरक्षण करें बल्कि उसे प्रदूषित होने से भी बचायें। इस सम्बन्ध में भारत के जल संरक्षण की एक समृद्ध परम्परा रही है और जीवन के बनाये रखने वाले कारक के रूप में हमारे वेद-शास्त्र जल की महिमा से भरे पड़े हैं। ऋग्वेद में जल को अमृत के समतुल्य बताते हुए कहा गया है- अप्सु अन्तः अमतं अप्सु भेषनं।जिस प्रकार से मानव समाज ने जल का दोहन किया है और नदी, कुएं, तालाब और पेड़ों को नष्ट किया है तो ऐसी स्थिति में जल संकट से हम बच नही सकते और इसके लिए आवश्यकता है समग्र रूप से जल संचय करने की मोबाइल वाणी के माध्यम से जल संचय की विधियों के बारे में चर्चा करना चाहूंगा। जल संचय की विधियाँनलकूपों द्वारा रिचार्जिंग - छत से एकत्र पानी को स्टोरेज टैंक तक पहुँचाया जाता है। स्टोरेज टैंक का फिल्टर किया हुआ पानी नलकूपों तक पहुँचाकर गहराई में स्थित जलवाही स्तर को रिचार्ज किया जाता है। उपयोग न किये जाने वाले नलकूप से भी रिचार्ज किया जा सकता है।गड्ढे खोदकर - ईंटों के बने ये किसी भी आकार के गड्ढे का मुँह पक्की फर्श से बंद कर दिया जाता है। इनकी दीवारों में थोड़ी-थोड़ी दूर पर सुराख बनाये जाते हैं इसकी तलहटी में फिल्टर करने वाली वस्तुएँ डाल दी जाती हैं।सोक वेज या रिचार्ज साफ्टस - इनका उपयोग वहाँ किया जाता है जहाँ मिट्टी जलोढ़ होती है। इसमें 30 सेमी व्यास वाले 10 से 15 मीटर गहरे छेद बनाये जाते हैं, इसके प्रवेश द्वार पर जल एकत्र करने के लिये एक बड़ा आयताकार गड्ढा बनाया जाता है। इसका मुुँह पक्की फर्श से बन्द कर दिया जाता है। इस गड्ढे में बजरी, रोड़ी, बालू, इत्यादि डाले जाते हैं।खोदे कुएँ द्वारा रिचार्जिंग - छत के पानी को फिल्ट्रेशन बेड से गुजारने के बाद कुओं तक पहुँचाया जाता है। इस तरीके में रिचार्ज गति को बनाये रखने के लिये कुएँ की लगातार सफाई करनी होती है।वास्तव में यह आज की जरूरत है कि हम वर्षाजल का पूर्ण रूप से संचय करें। यह ध्यान रखना होगा कि बारिश की एक बूँद भी व्यर्थ न जाए। इसके लिये रेन वॉटर हार्वेस्टिंग एक अच्छा माध्यम हो सकता है। आवश्यकता है इसे और विकसित व प्रोत्साहित करने की। इसके प्रति जनजागृति और जागरुकता को भी बढ़ाना समाज की आवश्यकता है।
बिहार राज्य के पूर्णिया जिले से रंजन कुमार जी ने मोबाईल वाणी के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया की आज विश्व हाइपरटेंशन दिवस है : यह रोग तेजी से बदलते जीवनशैली से हाइपरटेंशन से ग्रसित होने वाले लोगों में तेजी से इजाफ़ा हुआ है. हाइपरटेंशन यानि उच्च रक्तचाप से बचाव के लिए प्रत्येक वर्ष 17 मई को विश्व हाइपरटेंशन दिवस मनाया जाता है. रंजन कुमार जी ने बताया क्या है हाइपरटेंशन : इसे सामन्य भाषा में उच्च रक्तचाप भी कहा जाता है. यह दो प्रकार का होता है. पहला एस्सेनशिअल हाइपरटेंशन जो मूलतः अनुवांशिक, अधिक उम्र होने पर, अत्यधिक नमक का सेवन तथा लचर एवं लापरवाह जीवनशैली के कारण होता है. दूसरा सेकेंडरी हाइपरटेंशन जो उच्च रक्तचाप का सीधा कारण चिन्हित हो जाये उस स्तिथि को सेकेंडरी हाइपरटेंशन कहते हैं. यह गुर्दा रोग के मरीजों तथा गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन करने वाली महिलाओं में अधिक देखा जाता है.यह लक्ष्ण दिखाई दे तो हो जाएं सावधान : हाइपरटेंशन को शुरूआती लक्ष्णों से जाना जा सकता है एवं इससे बचा भी जा सकता है. सर में अत्यधिक दर्द रहना.लगातार थकावट का अहसास सीने में दर्द होना.सांस लेने में कठिनाई.दृष्टि में धुंधलापन पेशाब में खून आनागर्दन,सीने व बांहों में दर्द का लगातार बने रहनाजिले के जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारीसर्जन डा. सुभाष चंद्र पासवानने बताया कि ख़राब जीवनशैली के कारण धीरे-धीरे किशोर एवं युवक भी इस गंभीर समस्या से पीड़ित हो रहे हैं. इसलिए बिगडती जीवनशैली को ठीक करना बहुत जरुरी है. आहार में फ़ास्ट फ़ूड की जगह फलों का सेवन, सुबह जल्दी उठना एवं रात में जल्दी सोना, अवसाद एवं तनाव से बचना एवं नियमित व्यायाम से इस रोग से बचा जा सकता है. अधिकतर हाइपरटेंशन के रोगियों को मालूम भी नहीं रहता की वह इससे ग्रसित हैं तथा इसके लक्षणों को नजरंदाज करते हैं. इसे अनदेखा करने वाले मरीजों को गंभीर बीमारियों जैसे हृदयघात, मस्तिष्कघात, लकवा, ह्रदय रोग,किडनी का काम करना बंद हो जाना जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है. यह है कारण: तनावग्रस्त जीवनशैली हाइपरटेंशन के प्रमुख कारणों में से एक है. इसके अलावा धूम्रपान करना, मोटापा, अत्यधिक शराब का सेवन, अच्छी नींद का ना लेना, चिंता, अवसाद, भोजन में नमक का अधिक प्रयोग, गंभीर गुर्दा रोग, परिवार में उच्च रक्तचाप का इतिहास एवं थाईराइड की समस्या हाइपरटेंशन का कारण हो सकता है.क्या कहते हैं आँकड़ें : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण – 4 के अनुसार जिले में 0.4 प्रतिशत पुरुष गंभीर हाइपरटेंशन से ग्रसित हैं तथा 1.1 प्रतिशत पुरुष सामान्य हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं. महिलाओं में यह प्रतिशत अधिक है तथा जिले की 1.2 फीसदी महिलाएं गंभीर हाइपरटेंशन से एवं 1.5 प्रतिशत महिलाएं सामान्य हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं. क्या है उपचार- जिले की सिविल सर्जन डा. उषा किरण वर्मा बताती हैं की नियमपूर्वक व्यायाम करना, चिकित्सक द्वारा बताई गयी दवाओं का नियमित सेवन तथा तनाव घटाने हेतु योग क्रिया हाइपरटेंशन को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं. विशेषज्ञों का मानना है की अधिकतर हाइपरटेंशन के रोगियों को मालूम भी नहीं रहता की वो इससे ग्रसित हैं तथा इसके लक्षणों को नजरंदाज करते हैं. इसे अनदेखा करने वाले मरीजों को गंभीर बिमारियों जैसे हृदयघात, मस्तिश्कघात, लकवा, ह्रदय रोग,किडनी का काम करना बंद हो जाना जैसी स्तिथि का सामना करना पड़ता है.
