बिहार राज्य के जिला मुंगेर से विपिन कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि पोषक तत्वों की कमी के साथ संक्रामक रोग ज़िम्मेदार: एनीमिया के सबसे आम कारणों में पोषक तत्वों की कमी, विशेष रूप से आयरन की कमी शामिल होती है। इसके साथ ही विटामिन की कमी भी एनीमिया के लिए जिम्मेदार होते हैं। शरीर में विटामिन सी, ए, डी, बी12 एवं ई की भूमिका अधिक होती है। विटामिन सी शरीर में आयरन के चयापचय को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है। विशेष रूप से यह आयरन के अवशोषण एवं इसकी गतिशीलता को भी बढ़ाता है. इसलिए विटामिन सी युक्त आहार जैसे आँवला, नीबूं एवं अमरुद जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन जरुर करना चाहिए । ये खाद्य पदार्थ आसानी से घरों में उपलब्ध हो जाते हैं। एनीमिया के प्रमुख कारणों में पोषक तत्वों की कमी के साथ कई संक्रामक रोग भी शामिल होते हैं । जिसमें मलेरिया, टीबी, एचआईवी और अन्य परजीवी संक्रमण शामिल हैं. इन रोगों से ग्रसित होने के बाद अमूमन शरीर में खून की कमी हो जाती है ।
बिहार राज्य के जिला मुंगेर से विपिन कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि जिला के सभी चिकित्सा पदाधिकारी एवं स्वास्थ्य कर्मियों का सभी प्रकार का अवकाश (अध्ययन और मातृत्व अवकाश को छोड़कर) 28 फरवरी तक रद्द कर दिया गया है। इसको ले स्वास्थ्य विभाग से एक पत्र जारी किया गया है। इसके साथ ही पत्र में वर्तमान में अवकाश पर गए चिकित्सा पदाधिकारी और स्वास्थ्य कर्मियों से अविलंब काम पर लौटने का निर्देश दिया गया है। जिला के सिविल सर्जन डॉ. हरेन्द्र आलोक ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जारी पत्र के अनुसार जिला में कोरोना के बढ़ते संक्रमण की रोकथाम एवं इसके निरोधात्मक उपाय के लिए विशेष चौकसी एवं अनुश्रवण की आवश्यकता को देखते हुए उक्त आदेश को जारी किया गया है। इसके अनुसार जिला के सभी चिकित्सा पदाधिकारी संविदा/नियोजित सहित से लेकर सभी स्वास्थ्य कर्मी संविदा/नियोजित सहित जैसे स्वास्थ्य प्रशिक्षक, पारा मेडिकल स्टाफ, जीएनएम, एएनएम, शल्य कक्ष सहायक, लैब टेक्नीशियन के साथ ही चतुर्थ वर्गीय कर्मियों के सभी प्रकार के अवकाश को आगामी 28 फरवरी 2022 तक रद्द कर दिया गया है। जारी पत्र के अनुसार अध्ययन अवकाश और मातृत्व अवकाश पर गए चिकित्सा पदाधिकारियों और कर्मियों को इससे मुक्त रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आपदा विभाग की बैठक में निर्णय लिए की बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए 6 जनवरी से 21 जनवरी तक रात्रि कर्फ्यू लागू रहेंगे उन्होंने बताया कि कक्षा 8 तक के सभी स्कूल बंद रहेंगे जबकि कक्षा आठ से ऊपर के स्कूल कॉलेज 50% क्षमता के साथ चालू रहेंगे सरकारी एवं गैर सरकारी संस्था 50% के साथ ही कर्मी की उपस्थिति रहेगी।
मंगलवार को भी यातायात थाना द्वारा सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया जिसमें ₹1000 से अधिक की जुर्माना राशि भी वसूली गई वैसे गाड़ी चालक जिनके पास कागजात हेलमेट मार्क्स नहीं रहता उनका चालान काटा गया।
मंगलवार को सदर प्रखंड के अंतर्गत 9 टीकाकरण सेंटर बनाए गए थे जिसमें 460 बच्चे को को वैक्सीन की प्रथम खुराक लगाई गई इसकी जानकारी हेल्थ मैनेजर रवि कुमार ने दिए उन्होंने बताया की बच्चों में काफी खुशी दिख रहा है बच्चे टीका लेने टीकाकरण स्थल पर आ रहे हैं मंगलवार को 460 बच्चे को को वैक्सीन की प्रथम खुराक लगाई गई।
मुंगेर जिले के मंडल कारागार में कैदियों से मुलाकात करने गए लोग मायूस होकर वापस घर लौट रहे हैं लोगों ने बताया कि हम लोग अपने कैदियों से मुलाकात करने आए थे लेकिन 31 जनवरी तक मुलाकात ही बंद होने की सूचना मिली इससे हम लोग बिना मिले वापस जा रहे हैं।
मंगलवार को सदर प्रखंड के 4 पंचायत में आम सभा का आयोजन किया गया जिसमें तारापुर दियारा, जानकीनगर, नौवागढ़ी दक्षिणी, कटारिया शामिल थे सभी पंचायत के मुखिया के अध्यक्षता में आम सभा किया गया वही नौवागढ़ी दक्षिणी पंचायत के मुखिया प्रमिला देवी ने बताई की यह आम सभा मूल रूप से आवास प्लस सूची में जो लाभार्थी शामिल है उसमें से योग लाभार्थी को देखते हुए उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाएगा वहीं मनरेगा के तहत पशु शेड, वृक्षारोपण, अन्य योजनाओं भी वार्ड सभा कर वार्ड सदस्य देंगे आमसभा में उपस्थित आवास सहायक राकेश कुमार, पंचायत रोजगार सेवक आलोक कुमार, पंचायत तकनीकी सहायक सोनी कुमारी, विकास मित्र सीमा भारती, वार्ड सदस्य एवं सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे
मंगलवार को मुंगेर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जांच के दौरान 13 कोरोना संक्रमित पाए गए हैं जिसमें सदर अस्पताल की एक महिला चिकित्सक भी शामिल है इसकी जानकारी सिविल सर्जन डॉक्टर हरेंद्र कुमार आलोक ने दिए उन्होंने बताया कि मंगलवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जांच के दौरान 13 नए संक्रमित मरीज पाए गए हैं लोग मार्क्स पहने सैनिटाइजर का प्रयोग करें भीड़ भाड़ में ना जाए तभी सुरक्षित रह पाएंगे।
सोमवार को सदर प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों के कुल 13 टीकाकरण सेंट्रो पर 600 बच्चों को लगाई गई को वैक्सीन की प्रथम खुराक इसकी जानकारी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुशील कुमार झा ने दिए उन्होंने बताया कि आज से ही 15 से 18 वर्ष के आयु वाले बच्चों को टीका लगाने की शुरुआत की गई है
6 आयु वर्ग के लोगों को एनीमिया से मुक्ति दिलाने का रखा गया है 6 आयु वर्ग के लोगों को किया गया है लक्षित: जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला सामुदायिक उत्प्रेरक (डीसीएम) निखिल राज ने बताया एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत छह आयु वर्ग के लोगों को लक्षित किया गया है। जिसमें 6 से 59 महीने के बालक और बालिकाएं, 5 से 9 साल के लड़के और लड़कियाँ, 10 से 19 साल के किशोर और किशोरियां और 20 से 24 वर्ष के प्रजनन आयु वर्ग की महिलाएँ (जो गर्भवती या धात्री न हो) और गर्भवती महिलाएं एवम शिशु को स्तनपान कराने वाली महिलाएं शामिल हैं। प्रदान की जाती है निःशुल्क दवा : उन्होंने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत सभी 6 आयु वर्ग के लोगों में एनीमिया रोकथाम की कोशिश की जा रही है। इसके तहत 6 से 59 महीने के बालक और बालिकाओं को हफ्ते में दो बार आईएफए की 1 मिली लीटर सीरप आशा कार्यकर्ता के द्वारा उनकी माताओं को निःशुल्क दी जाती है। 5 से 9 साल के लड़के और लड़कियों को हर सप्ताह आईएफए की एक गुलाबी गोली दी जाती है। यह दवा प्राथमिक विद्यालय में प्रत्येक बुधवार को मध्याह्न के बाद शिक्षकों के माध्यम से निःशुल्क दी जाती है। इसके साथ ही 5 से 9 साल तक के वैसे बच्चे जो स्कूल नहीं जाते हैं, उन्हें आशा कार्यकर्ता गृह भ्रमण के दौरान उनके घर पर ही आईएफए की गुलाबी गोली देती हैं। 10 से 19 साल के किशोर और किशोरियों को हर हफ्ते आईएफए की 1 नीली गोली दी जाती है जिसे विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों पर प्रत्येक बुधवार को भोजन के बाद शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी सेविका के माध्यम से निःशुल्क प्रदान की जाती है। 20 से 24 वर्ष के प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं को आईएफए की एक लाल गोली हर हफ्ते आरोग्य स्थल पर आशा कार्यकर्ता के माध्यम से निःशुल्क दी जाती है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के चौथे महीने से प्रतिदिन खाने के लिए आईएफए की 180 गोलियाँ दी जाती है, यह दवा उन्हें ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के दिन प्रदान की जाती है। इसके साथ ही धात्री माताओं के लिए भी प्रसव के बाद आईएफए की 180 गोली दी जाती है, जिसे उन्हें प्रतिदिन खाने की सलाह दी जाती है। इस दवा का भी वितरण ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के दिन निःशुल्क ही होता है। सप्ताह में दो ख़ुराक दिलाएगी आपके बच्चे को खून की कमी से निज़ात : उन्होंने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत 6 माह से 59 माह तक के बच्चों को सप्ताह में दो बार आईएफए (आयरन फोलिक एसिड) सीरप देने का प्रावधान किया गया है। एक ख़ुराक में 1 मिली लीटर यानी 8-10 बूंद होती है। सभी आशा को स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सीरप की 50 मिलीलीटर की बोतलें आवश्यक मात्रा में दी जाती है। प्रथम दो सप्ताह में आशा स्वयं बच्चों को दवा पिलाकर माँ को सिखाने का प्रयास करती हैं एवं अनुपालन कार्ड भरना सिखाती हैं। दो सप्ताह के बाद ख़ुराक, माँ द्वारा स्वयं पिलाने तथा अनुपालन कार्ड में निशान लगाने के विषय में इस कार्यक्रम के दिशा-निर्देश में विशेष बल दिया गया है।
