बिहार कृषि विश्वविद्यालय के "ई - उद्यान चौपाल" से जुड़े किसान पुत्र राजन कुमार मैं गौरवान्वित हूं कि मैं किसान का बेटा हूं, हम सबको अन्नदाताओं का सम्मान करना चाहिए; अभिनेता राजन कुमार बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर की ओर से आज 28 मई को तमाम किसान भाइयों के लिए "ई - उद्यान चौपाल" का आयोजन किया गया, जिससे अभिनेता राजन कुमार भी जुड़े और उन्होंने अपनी बात भी रखी। e - उद्यान चौपाल के टॉपिक पर इस ज़ूम मीटिंग के वक्ता और संयोजक डॉ अभय मानकर (उपनिदेशक प्रशिक्षण, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर) थे। इसमें कई वक्ता साइंटिस्ट भी थे। डॉ विकास दास, डॉ अमरेंद्र कुमार और डॉ तमोघणो साहा ने अपनी बातें पेश कीं। मुख्य संरक्षक डॉ आरके सोहाने, संरक्षक डॉ आर एन सिंह थे। मुंगेर बिहार के किसान पुत्र राजन कुमार ने इस विशेष चौपाल में हिस्सा लेकर अपनी बातें साझा कीं। उन्होंने बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर की प्रशंसा की। इस कोरोना काल और लॉक डाउन के दौरान इस तरह के विषय पर एक चौपाल का आयोजन करने के लिए उन्होंने डॉ अभय मानकर (उपनिदेशक प्रशिक्षण, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर) को भी मुबारकबाद पेश की। किसानों से जुड़े हुए यहां कई किस्म के ज्ञान बीएयू द्वारा दिये गए। बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में यहां के वैज्ञानिकों, अधिकारियों ने खेती की नई नई तकनीक का ज्ञान दिया। इससे बिहार में एक नई क्रांति आने में मदद मिलेगी। राजन कुमार ने कहा कि हमारे मुल्क भारत की आत्मा गांव में बसती है और गांव में किसान रहते हैं, जिन्हें अन्नदाता भी कहा जाता है। बिना अन्न के जीना मुमकिन नहीं है। मैं गौरवान्वित हूं कि मैं किसान का बेटा हूं। कृषि विज्ञानियों की चमत्कारी कोशिशों और किसानों की दिन रात की मेहनत व लगन की बदौलत आज बिहार विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। किसान और अभिनेता राजन कुमार ने आगे कहा कि अपने किसानों का सम्मान जरूर करें क्योंकि इन्ही किसानों की वजह से हम सब ज़िंदा हैं। कोरोना काल और लॉक डाउन में लोग फ्रीज या एसी खरीदने नही जा रहे हैं उन्हें अनाज, सब्जी चाहिए और यह चीजें किसान पैदा करते हैं। मुझे गर्व हैं कि मैं एक किसान का बेटा हूँ। मुझे खेतों में काम करना, खेती करना अच्छा लगता है। कुछ लोग किसानों को गांव वाला, गरीब, मजदूर, लाचार समझते हैं हालांकि इन्ही किसानों की वजह से लोगो का पेट भरता है। आज कई उद्योग बंद हो गए हैं मगर खेती जारी है और जारी रहेगी। अन्नदाताओं पर राजन कुमार की लिखी एक कविता "किसान" काफी वायरल हुई है जिसमे उन्होंने किसानों की अहमियत और उनके दर्द को बखूबी प्रस्तुत किया है। राजन कुमार लिखते हैं "किसान...देश की आन हैं, भारत की शान हैं, हमसे चलती जीवन धारा, श्रम ही है संकल्प हमारा, सादा जीवन उच्च विचार, अपने जीवन का आधार।" मैं गौरवान्वित हूं कि मैं किसान का बेटा हूं, हम सबको अन्नदाताओं का सम्मान करना चाहिए; अभिनेता राजन कुमार बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर की ओर से आज 28 मई को तमाम किसान भाइयों के लिए "ई - उद्यान चौपाल" का आयोजन किया गया, जिससे अभिनेता राजन कुमार भी जुड़े और उन्होंने अपनी बात भी रखी। e - उद्यान चौपाल के टॉपिक पर इस ज़ूम मीटिंग के वक्ता और संयोजक डॉ अभय मानकर (उपनिदेशक प्रशिक्षण, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर) थे। इसमें कई वक्ता साइंटिस्ट भी थे। डॉ विकास दास, डॉ अमरेंद्र कुमार और डॉ तमोघणो साहा ने अपनी बातें पेश कीं। मुख्य संरक्षक डॉ आरके सोहाने, संरक्षक डॉ आर एन सिंह थे। मुंगेर बिहार के किसान पुत्र राजन कुमार ने इस विशेष चौपाल में हिस्सा लेकर अपनी बातें साझा कीं। उन्होंने बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर की प्रशंसा की। इस कोरोना काल और लॉक डाउन के दौरान इस तरह के विषय पर एक चौपाल का आयोजन करने के लिए उन्होंने डॉ अभय मानकर (उपनिदेशक प्रशिक्षण, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर) को भी मुबारकबाद पेश की। किसानों से जुड़े हुए यहां कई किस्म के ज्ञान बीएयू द्वारा दिये गए। बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में यहां के वैज्ञानिकों, अधिकारियों ने खेती की नई नई तकनीक का ज्ञान दिया। इससे बिहार में एक नई क्रांति आने में मदद मिलेगी। राजन कुमार ने कहा कि हमारे मुल्क भारत की आत्मा गांव में बसती है और गांव में किसान रहते हैं, जिन्हें अन्नदाता भी कहा जाता है। बिना अन्न के जीना मुमकिन नहीं है। मैं गौरवान्वित हूं कि मैं किसान का बेटा हूं। कृषि विज्ञानियों की चमत्कारी कोशिशों और किसानों की दिन रात की मेहनत व लगन की बदौलत आज बिहार विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। किसान और अभिनेता राजन कुमार ने आगे कहा कि अपने किसानों का सम्मान जरूर करें क्योंकि इन्ही किसानों की वजह से हम सब ज़िंदा हैं। कोरोना काल और लॉक डाउन में लोग फ्रीज या एसी खरीदने नही जा रहे हैं उन्हें अनाज, सब्जी चाहिए और यह चीजें किसान पैदा करते हैं। मुझे गर्व हैं कि मैं एक किसान का बेटा हूँ। मुझे खेतों में काम करना, खेती करना अच्छा लगता है। कुछ लोग किसानों को गांव वाला, गरीब, मजदूर, लाचार समझते हैं हालांकि इन्ही किसानों की वजह से लोगो का पेट भरता है। आज कई उद्योग बंद हो गए हैं मगर खेती जारी है और जारी रहेगी। अन्नदाताओं पर राजन कुमार की लिखी एक कविता "किसान" काफी वायरल हुई है जिसमे उन्होंने किसानों की अहमियत और उनके दर्द को बखूबी प्रस्तुत किया है। राजन कुमार लिखते हैं "किसान...देश की आन हैं, भारत की शान हैं, हमसे चलती जीवन धारा, श्रम ही है संकल्प हमारा, सादा जीवन उच्च विचार, अपने जीवन का आधार।"
