"बच्चों के जीवन भर की यात्रा में उनकी सुरक्षा, संरक्षण और खुशहाली सुनिश्चित करें ": नफीसा शफीक, यूनिसेफ CHILDLINE को पिछले साल संकटग्रस्त बच्चों के संबंध में कुल 13,039 कॉल प्राप्त हुए पिछले साल COVID -19 के कारण रिवर्स माइग्रेशन के कारण बाल शोषण की घटनाओं में वृद्धि देखी गयी, जिसमें बाल श्रम, तस्करी, घरेलू हिंसा जैसे जोखिम शामिल थे। COVID 19 की दूसरी लहर के दौरान, बच्चे और युवा तेजी से प्रभावित हो रहे हैं। इस पहल का लक्ष्य लगभग 10 लाख प्रवासियों तक पहुंचना है, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर शामिल हैं। "महामारी के कारण पैदा हुआ आर्थिक संकट और पलायन, बच्चों के सुशोभन सी, समन्वयक बिहार, चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन ने विस्तार पूर्वक चाइल्ड लाइन 1098 के बारे में बताया. जानकारी दी कि 1098 सारे SAARC देशो में भी कार्यरत है. उन्होंने कहा की पिछले वर्ष CHILDLINE को बिहार से बच्चों से कुल 13039 कॉल आये थे,जहाँ उन्हें आपातकालीन सेवा की जरुरत थी । श्री सुशोभन ने साइलेंट काल्स के बारे में बताया, जिसमे कॉल करने वाला व्यक्ति चुप रहता है और चाइल्ड लाइन के टीम को उनका विश्वास जितना पड़ता है तब जा कर बच्चे कुछ बोल पाते है. निपुण गुप्ता ,संचार विशेषज्ञ UNICEF, बिहार ने मीडिया के महत्व के बारे में बताया , सकारात्मक खबरों से लोगो में एक विश्वास जागता है और सही सूचना जनता तक पहुचती हमें उम्मीद , सहयोग और सकारात्मकता के संक्रमण को फैलाना है ओर covid को मिटाना है सनत कुमार सिन्हा, निदेशक बाल सखा ने सभी को धन्यवाद दिया तथा रेलवे चाइल्ड लाइन टीम का मनोबल बढाया. उन्होंने कहा कि इस त्रासदी के समय वालंटियर्स और रेलवे चाइल्ड लाइन की टीम निरंतर अपने काम में लगी हुई है. सैफुर रहमान, बाल सुरक्षा सलाहकार UNICEF बिहार, ने परियोजना के डिजाईन के बारे में विस्तार पूर्वक बताया रिचा बाजपेयी ने धन्यवाद ज्ञापन किया ।