ऑल इंडिया किसान खेत मज़दूर सन्गठन द्वारा कल हरियाणा के करणाल में किसानों पर हरियाणा पुलिस के बर्बर दमन के विरुद्ध हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम स्थल नौआगढी मस्जिद मोड़ के सामने नेता जी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा के सामने ऑल इंडिया किसान खेत मज़दूर संगठन के कार्यकर्ता एवं ग्रामीण, समाजसेवी साथियों ने जम कर खट्टर सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए। कार्यक्रम की अध्यक्षता A IKKMS के ज़िला सदस्य रविन्द्र मंडल ने की और मुख्य वक्ता के रूप में समाजसेवी ख़ालिद सैफुल्लाह उपस्थित रहे। अध्यक्षता करते हुए रविन्द्र मंडल ने कहा के हरियाणा की सरकार ने कल जिस तरह कड़ाके की ठंड में किसानों पर वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागे हैं वो ब्रिटिश काल की याद दिलाता है। आरएसएस द्वारा संचालित और सत्ता प्रस्तावित फ़र्ज़ी किसान संगठनों को कृषि मंत्री जी बुला कर फ़ोटो खिंचवा रहे हैं और अडानी अम्बानी की पूंजी पर खड़ा मीडिया उन फ़र्ज़ी किसानों को इन दमनकारी काले कृषि कानूनों के समर्थन में मिलने वाले समर्थन के रूप में प्रोफाइल कर रहा है। सवाल ये है के जब कानून कृषकों के हित मे है तो सरकार फ़र्ज़ी किसान सँगठनों के समर्थन पत्र जिसकी स्क्रिप्ट नागपुर में लिखी जा रही है, उसे इन कानूनों के समर्थन में मिलने वाले जनसमर्थन के रूप में दिखा कर कौन सा कुकर्म छुपाने का कुत्सित प्रयास कर रही है। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए ऑल इंडिया रिव्यूलुशनरी फ़ोरम के सह संयोजक फ़र्रह शकेब ने कहा ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, जैसे भाजपा शासित राज्यों की पुलिस प्रादेशिक एवं केंद्रीय सत्ता के इशारे पर निरन्तर किसान आंदोलन के बर्बर दमन पर उतर आई है। मोदी सरकार निरन्तर अपने नागरिकों को सम्विधान में निहित आर्टिकल 19 के तहत दिए गए नागरिक अधिकारों का दमन कर रही है और फ़ासीवादी नीतियों के अधीन इस देश मे एक निरंकुश सत्ता स्थापित करना चाहती है। मुख्य वक्ता समाजसेवी ख़ालिद सैफुल्लाह ने कहा के ये पहला आंदोलन है जब आंदोलनकारी केवल सत्ता के विरुद्ध नही बल्कि देश लुटेरे पूंजीवादी शक्तियों के ख़िलाफ़ भी मुखर हैं और पंजाब हरियाणा जैसे राज्यों में रिलायंस जियो टावर तोड़ने से ले कर अम्बानी अडानी के उत्पादों के बहिष्कार का भी आह्वान कर रहे हैं। खालिद सैफुल्लाह ने कहा आज अन्नदाता किसान पूरे दिल्ली को घेरे हुए हैं और देश का सरकार किसानों की मांगों को पूरा करने के बजाय उस पर प्राथमिकी दर्ज करने में लगी है बंगाल में एक मुट्ठी चावल और हरियाणा में खट्टर सरकार किसान महापंचायत का ढोंग कर रही है और जनता के बीच भ्रम फैला रही लेकिन यह कृषि कानून इतना खतरनाक है कि सिर्फ किसान ही नहीं बल्कि आम जनता भी भुखमरी के शिकार होंगे आप सोच सकते हैं के किस तरह आवश्यक वस्तु कानून 1955 में संशोधन करते हुए,आलू प्याज सभी प्रकार का अनाज दाल चावल,तेल तथा कृषि में उपयोग करने वाला उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं को इस से बाहर कर दिया गया है इससे बड़े-बड़े पूंजी के मालिक भंडार भर के कालाबाजारी करेंगे और लुट का द्वार खुलेगा। किसान नेता पंकज प्रीतम ने कहा सरकार तीनों कानून में निजी निवेश की बात करती है हम मांग करते हैं कि निजी पूंजी के जगह पर सरकारी पूंजी कानून में शामिल कर लिया जाए तो यह आंदोलन अपने आप समाप्त हो जाएगा। पुतला दहन कार्यक्रम में सुभाष कुमार, मनजीत गुप्ता,पिंटू कुमार, दिनेश कुमार,मोहम्मद शमीम, मेसो,सत्येंद्र कुमार और ज्ञानी मंडल इत्यादी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।