श्रोताओं वैश्विक महामारी करो ना काल के कारण मंदी का मकड़जाल ऐसा है कि गांवों से पलायन कर शहर गए मजदूर आज दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है शहर में नौकरी से निकाले जाने के बाद वापस अपने गांव पहुंचे हैं इस उम्मीद के साथ कि अपने गांव कस्बे में मनरेगा जैसी योजनाओं में उन्हें काम मिलेगा लेकिन यहां भी उन्हें निराशा ही मिलती है ऐसी स्थिति में उन्हें अपना और अपने परिवार के भरण-पोषण करने में भी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है
