किसान सलाहकार को विधि व्यवस्था एवं गैर कृषि कार्यों से मुक्त करने को लेकर किसान सलाहकारों ने शनिवार को कृषि कार्यालय में जमकर प्रदर्शन किया। साथ ही मुख्य सचिव बिहार पटना को आवेदन देकर गैर कृषि कार्य से मुक्त करने की मांग की है।विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें। दिए गए आवेदन में कहा गया है कि अनेक जिलों में किसान सलाहकारों को विधि व्यवस्था एवं गैर कृषि कार्यों में प्रतिनियुक्ति किया जा रहा है । जिससे कृषि योजनाओं के कार्यान्वयन में कठिनाई हो रही है । वर्तमान में इन कठिनाइयों के कारण खरीफ अभियान पर प्रभाव पड़ रहा है तथा समय पर कृषि कार्य योजना प्रभावित भी हो रही है।विदित हो कि किसान सलाहकार से संबंधित निर्गत मार्गदर्शिका के कंडिका 10 में स्पष्ट है कि किसान सलाहकारों को मात्र कृषि कार्य में ही लगाया जाएगा। परंतु इसका अनुपालन शतप्रतिशत सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण कतिपय स्थानों से शिकायतें प्राप्त हो रही है। इस संबंध में उपरोक्त प्रासंगिक पत्र द्वारा पूर्व में भी विकास आयुक्त, कृषि उत्पादन आयुक्त बिहार पटना एवं प्रधान सचिव कृषि विभाग बिहार पटना द्वारा आदेश निर्गत किया गया है। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में निर्देश दिया गया है कि किसान सलाहकारों को कृषि कार्यों में नहीं लगाया जाए। बावजूद अगर इसके दौरान सर्वेक्षण कर्ता की मृत्यु हो जाती है तो उनके आश्रित को अनुकंपा देने का प्रावधान एवं समूह बीमा के माध्यम से उनके आश्रित को 50 लाख रूपये का बीमा देने की व्यवस्था किया जाए। किसान सलाहकार को अल्प मानदेय का भुगतान विगत 6 माह से नहीं हो पाने के कारण हमारी आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय हो चुकी है। भुखमरी के हालात में जीने को मजबूर हैं। पारिवारिक दायित्वों की पूर्ति नहीं होने के कारण हम लोग विवश व लाचार महसूस कर रहे हैं। सभी किसान सलाहकार के पास एंड्रॉयड मोबाइल सेट अनुपलब्ध होने के कारण हर खेत में पानी सर्वे का कार्य करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही साथ कुछ किसान सलाहकार के गृह पंचायत प्रखंड कार्यालय से पदस्थापित पंचायत सह प्रखंड कार्यालय की दूरी 50 से 60 किलोमीटर की दूरी का सामना करना पड़ता है जो कि लॉकडाउन के कारण आने जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस अवसर पर किसान सलाहकार गोपाल पासवान, पुटुक लाल पासवान , पाठक जी, निरंजन कुमार, सहित जिले भर के किसान सलाहकार मौजूद थे।
