कोरोना संक्रमण काल में खुल गया बिहार स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल -राजद राजद राज्यपरिषद सदस्य नरेश सिंह यादव,जिला महासचिव सह मीडिया प्रभारी गजेंद्र कु हिमांशु उर्फ अरविंद,रणजीत गुप्ता,जिला सचिव राजेश रमन उर्फ राजू ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि नीतीश कुमार पिछले 15 वर्षों से बिहार की पर सत्ता काविज हैं। उन्होंने जब बिहार की बागडोर संभालने के साथ हीं बड़ा लम्बा चौड़ा घोषणा किये थे कि मैं बिहार के स्वास्थ्य व्यवस्था को इतना सबल व सुदृढ़ कर दूंगा कि किसी भी व्यक्ति को बेहतर इलाज के लिए बिहार से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।बिहार के सभी जिला अस्पताल को हाइटेक सुविधाओं से लैस कर देगें ताकि बिहार के आम लोगों का बेहतर इलाज हो सके। परंतु सत्ता संभालने के 15 वर्षों बाद भी बिहार के सभी जिला अस्पतालों की स्थिति बद से बत्तर हो गई है,जिसका खुलासा इस कोरोना संक्रमण काल में हुआ है।आज विगत 5 महीने से कोरोना संक्रमण काल मे बिहार सरकार की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था का पोल खुल गया है।लगभग 5 महीने की लॉकडान अवधि में भी बिहार सरकार जिले एवं अनुमंडल स्तर पर भी संक्रमित मरीजों की देखभाल एवं इसके संक्रमण के चेन को रोकने में पूरी तरह से असफल साबित हुआ है। कोरोना के जाँच में भी बिहार राज्य सबसे फिसड्डी है। मुंगेर सहित बिहार में यह खतरनाक वायरस तेजी से पांव पसार रहा है ।फिर भी स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन संक्रमित लोगों के जानमाल की सुरक्षा एवं समुचित जाँच करवाने के बजाय मोटरसाइकिल एवं वाहन चेकिंग करने में व्यस्त है। अस्पतालों में जहां जाँच किट का अभाव है वहीं हमारे बहादुर स्वस्थ कर्मी एवँ डॉक्टर के लिए सुरक्षा कीट भी उपलब्ध नहीं है।जिसके चलते हमारे स्वस्थ कर्मी एवं डॉक्टर भी संक्रमण के चपेट में आ रहे हैं। संक्रमित लोगों को क़वारेंटिंन सेंटरो में रखने के बजाय उससे होम क़वारेंटिंन कर रहे हैं जिससे लोगों में डर बना हुआ है तथा इसके संक्रमण को फैलने का भी खतरा बरकरार है। सबसे बुरा हाल तो मुंगेर जिला अस्पताल का है।कोरोना संक्रमित मरीजों की तो दूर आम मरीजों का भी सही से इलाज नहीं होता है। मुंगेर सदर अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर एवँ सर्जन नहीं है ।जबकि मुंगेर पुराना जिला के साथ साथ कमिश्नरी मुख्यालय भी है।यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे है।रोज दर्जनों एम्बुलेंस की सायरन बजते हुए छोटी छोटी बीमारियों में भी यहाँ से मरीजों को भागलपुर एवं पटना रेफर कर दिया जाता है। सूबे के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, एवं स्वास्थ्य मंत्री 5 महीनों से अपने आवास से नहीं निकलते हैं। जिला अस्पताल तो दूर राजधानी पटना के अस्पतालों में भी ये लोग मरीजों के हाल चाल नहीं ले रहे हैं।ये लोग चुनाव की तैयारी के लिए वर्चुअल रैली करने में नित्य दिन लगे हुए है।भाजपा एवं जदयू के वर्चुअल रैली और मीटिंग के कारण हीं बिहार एवं मुंगेर में कोरोना पुनः पांव पसार रहा है।
