प्राचार्य पद को लेकर प्लस टू - हाई स्कूल के शिक्षक आमने-सामने। गंगा रजक की रिपोर्ट। मुंगेर। राज्य सरकार द्वारा नियोजित शिक्षकों को 12 साल कार्य के बाद प्राचार्य पद दिए जाने से प्लस टू शिक्षक विरोध कर रहे हैं और दोनों शिक्षक आमने-सामने हो गए हैं। इस विवाद को उलझाने में राज्य सरकार का शिक्षा विभाग ही है, क्योंकि पूर्व में प्लस टू शिक्षक को वरियता के आधार पर हाई स्कूल से 12 साल वरिय माना गया है। जिसको लेकर स्नातकोत्तर शिक्षक संगठन के कृतन्जय कुमार ने आपत्ति दर्ज की है। जिसके बाद मामला दोनों शिक्षकों के बीच आमने-सामने है। वैसे माध्यमिक शिक्षक संघ और प्लस टू संगठन में अभी तकरार नहीं हुई है। लेकिन न्यायिक प्रक्रिया प्लस टू शिक्षक जाएंगे एक ओर देखा जाए तो राज्य सरकार भी काफी चालाकी से अपना कार्य कर रही है और वह या भी चाहती है दोनों शिक्षकों में बंदर की भांति लड़ाई हो और रोटी मैं खाते रहूं। वहीं दूसरी ओर हाई स्कूल के शिक्षकों को 12 साल वरीय मानकर प्रभारी शिक्षक बनाना ऐसा प्रतीत होता है कि माध्यमिक शिक्षक संघ का दबदबा अभी भी सरकार पर कायम है। वही एक ओर सरकार कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। किसे अपना माने किसे पराया क्योंकि आगे विधानसभा चुनाव है। सरकार के नीति और निर्धारण पर अब खोट दिखने लगा है । जबकि इसके पूर्व दोनों संगठन ने एक साथ सरकार के खिलाफ हड़ताल में बिगुल फूंका था। लेकिन कोरोना ने दोनों संगठन को मार डाला। जिसके बाद हड़ताल खत्म हो गया। अब देखना है की प्लस टू संगठन भारी पड़ता है या माध्यमिक शिक्षक संगठन इस बीच दोनों के लड़ाई में राज्य सरकार को फायदे ही फायदे हैं। ज्ञातव्य हो कि सरकार के न्याय उचित व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगने लगा है। क्योंकि राज्य सरकार में 12 साल वरिय शिक्षक होकर भी विद्यालय में प्रभारी प्राचार्य नहीं बनाए जाते हैं साथ ही सभी विद्यालयों में हाई स्कूल के ही शिक्षक प्रभारी होते हैं ।फिलवक्त दोनों के लड़ाई में राज्य सरकार मजे मार रही है। क्योंकि उसे पद के साथ वेतन भी देना होगा। जिसका लाभ करोड़ों करोड़ सरकार के पेट में जा रहा है। वही रजिस्टर्ड के अनुसार प्लस टू शिक्षक जब नियुक्ति लेते हैं । उसे 12 वर्ष वरीय माना जाता है और रजिस्टर्ड में लिखा पढ़ी भी होता है। लेकिन यह सिर्फ ऑफीशियली खानापूर्ति है। राज्य सरकार ने यह भी नियमावली बना दिया है कि जो पहले ज्वाइन किया है। वही प्रभारी प्राचार्य होंगे इस तमाम झंझावात के बीच किसी भी प्रभारी प्राचार्य को प्राचार्य के नामों पर वेतन का ठेंगा दिखाया जाता है लेकिन इस पद में यह लोचा हैं कि चाँँदी के सिक्के खनकते हैं। इस लोचा के लिये प्रभारी पद मलाईदार माना जाता है।