बिहार राज्य के मुंगेर जिला से विपिन कुमार कहते हैं की वैश्विक महामारी करो ना की वजह से लगभग 4 महीने की देश बंदी एवं विद्यालय बंदी के कारण कई क्षेत्रों पर बहुत बुरा असर पड़ा है।इनमें से एक निजी प्राइवेट स्कूल के शिक्षक भी हैं लॉकडाउन एवं अनलॉक वन में स्कूल तो बंद ही है सरकार ने दिशा निर्देशों जारी करके बताया कि बच्चों की फीस के लिए अभिभावकों को परेशान नहीं किया जाएगा। मगर इस बात से भी इनकार करना मुश्किल है कि जो शिक्षक दूसरे बच्चों के जीवन को सँवारने के लिए अपनी जान लगा देते हैं आज उनका जीवन अंधकारमय होने लगा है। निजी स्कूलों के आय का एकमात्र साधन मासिक फीस ही है जिसके अभाव में प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों का वेतन भुगतान नहीं होने के कारण इन शिक्षकों के एक बहुत बड़े समुदाय के परिवारों की भूखमरी तक का सामना करना पड़ रहा है।