छात्रों को राह से भटका दिया है शिक्षक की हड़ताल और लॉक डाउन ने। टिक टॉक वीडियो और गेम में भिड़े बच्चे, देश में टॉप आते रहे हैं बिहारी छात्र। मुंगेर से गंगा रजक की खास रिपोर्ट। मुंगेर। लॉक डाउन को लेकर राज्य के विद्यालय को बंद कर दिए जाने के बाद शहर व ग्राम के छात्रों में इसका काफी दुष्प्रभाव पड़ा है। जिससे समाज का हर तबका परेशान है । छात्रों का जो समय विद्यालय में पढ़ने में लगता था। अब वह समय टिक टॉक वीडियो बनाने ऑनलाइन गेम खेलने में टी बी पर कार्टून देखने में जा रहा है। यह शहरी बच्चों का आलम है। वही ग्राम एवं सुदूर क्षेत्र में छात्र व बच्चे गुल्ली डंडा, लूडो, गुल्ली, कैरम बोर्ड शैतानी खेल खेल रहे हैं। यह दुष्प्रभाव बच्चों में घर कर गया है। और मना करने पर चिड़चिड़ा जैसा व्यवहार अभिभावक से कर रहे हैं। जिससे अभिभावक वर्ग खासे परेशान है। बहुत ऐसे अभिभावक हैं। जो बच्चों को इसलिए स्कूल भेजते हैं जिससे 6 से 8 घंटे अभिभावक तो तंग ना करें। शहर के कुछ अभिभावक ऐसे हैं । जो जागरूकता तो है लेकिन चाइना गेम टिक टॉक वीडियो ने बच्चों को ऐसा क्या कर लिया है। जो कलह का कारण बनता जा रहा है । एक ओर बच्चों को शिक्षकों का हड़ताल ने पढ़ाई बाधित कराया तो दूसरी और हड़ताल के बाद लॉक डाउन ने। हड़ताल क्रमशः 17 फरवरी एवं 25 फरवरी से किया गया। यदि देखा जाए तो लगातार तीन से साढ़े तीन माह हो गया है। शिक्षकों और छात्रों के बीच संवाद का। राज्य सरकार का यह दायित्व है कि बिहार के छात्र किस ओर जा रहे हैं। छात्रों का विद्यालय आज क्वारंटाईन सेंटर बना हुआ है। बताते चलें कि बिहार के छात्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। गरीब राज्य में गरीब छात्रों ने पूरे देश में अपना डंका बजाया है। चाहे वह आईएएस की परीक्षा हो या बैंक की परीक्षा हो या रेलवे सहित अन्य परीक्षा ह़ो।
