लगातार दो महीना से अधिक शिक्षकों का हड़ताल चलने से बिहार के आम विद्यार्थी परेशान है और शिक्षा के लिए बिलबिला रहे हैं। सर्वविदित है कि राज्य सरकार के करीब चार लाख शिक्षक 3 यूनियन के बैनर तले अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। जिससे विद्यार्थियों में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। शिक्षक संगठन यह सोचकर हड़ताल में गए थे कि उनका वेतन विसंगति दूर होगा और स्थानांतरण मिलते हुए पीपीएफ के पैसे भी कटेंगे। लेकिन कोरोना वायरस ने इस कदर संक्रमण लाया की हड़ताल पर ग्रहण ला दिया और साथ ही साथ 62 शिक्षक भी शहीद हो गए। इस बीच इंटर का रिजल्ट राज्य सरकार ने दे दिया। जिसका नवीन एडमिशन रुका हुआ है और विद्यालय बंद होने से इसका प्रमाण पत्र भी रुके हुए हैं। दूसरी और मैट्रिक का रिजल्ट भी रुका हुआ है। यह तमाम कार्य लॉक डाउन के कारण रुका हुआ है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य के अन्य शिक्षा संगठन ने अपनी पढ़ाई व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से शुरू कर दी है। जिसका विधिवत क्लास घर से ही शिक्षक- शिक्षिका ले रही है। ऐसे संगठनों में राज्य के तमाम निजी स्कूल के अलावा नेट्रोडेम एकेडमी केंद्रीय विद्यालय, सरस्वती विद्या मंदिर, डीएवी में ऑनलाइन पढ़ाई जारी है। वही इस बीच राज्य सरकार के शिक्षकों द्वारा हड़ताल किए जाने के कारण विद्यार्थियों का पढ़ाई बाधित है। जिससे विद्यार्थी इधर-उधर टकटकी निगाह से देख रहे हैं। ज्ञात हो की दूरदर्शन पर 9वी एवं 10वीं के बच्चों के लिए पढ़ाई कराई जा रही है। जो स्मार्ट क्लास के तहत है। इससे विद्यार्थियों को संपूर्ण फायदे नहीं हो रहे हैं। वहीं वर्ग 8 वी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जिससे विद्यार्थी परेशान है। और शिक्षा से महरूम है। इस संदर्भ में माध्यमिक शिक्षक संघ के सचिव वकील राम ने तंज कसते हुए कहा कि सरकारी विद्यालयों में गरीब व मिडिल परिवार के छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। स्मार्ट क्लास निजी शिक्षण संस्थानों में प्राइमरी सेक्शन से ही प्रारंभ हो जाती है। मगर राज्य के सरकारी विद्यालयों में प्राइमरी से स्मार्ट क्लास शुरू नहीं कर नवमी एवं दसवीं से प्रारंभ किया जाना राज्य के गरीब छात्रों का माखौल व मजाक उड़ाने सामान है। तथा इसी बहाने राज्य सरकार शिक्षा को निजीकरण की ओर धकेलना चा रही है।