श्रोताओं मंदी का मकड़जाल ऐसा है कि पलायन मजदूर को मनरेगा से भी निराशा ही हाथ लगी और वह मजदूर शहर में भी आज भी दर-दर की ठोकरें खाने को लाचा और विवश है शहर से नौकरी से छपने के बाद वह अपने गांव जब वापस पहुंचे तब वह काम की तलाश में मनरेगा का हाथ पकड़ने गया लेकिन मनरेगा में भी काम बरसों से बंद होने के कारण वहां से भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी विस्तारपूर्वक जाने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें