बिहार राज्य के जिला मुंगेर से विपिन कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि थर्मोकोल के आगमन से पहले हम जितनी भी चीजे अपने जीवन में उपयोग करते थे। उनका एक समय बाद छय हो जाता था। अभी के दौर में थर्मोकोल से पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंच रही है। इसका कभी छय नहीं होता है।कोई कीड़ा नहीं जो थर्माकोल को खाता हो कोई जीवाणु भी नहीं है जो थर्माकोल से पोषण पाता हो मूल रूप से थरमोकोल पेट्रोलियम पदार्थों से बने रहते है और उसके पूरे रासायनिक संगठन की विशेषता यह होती है कि उसमें किसी भी तरह से ऑक्सीजन भी नहीं होती है ,इस कारण से जीवाणुओं के लिए भी वह बेमतलब की चीज है उसे जलाकर नष्ट करना और भी ज्यादा खतरनाक होता है।