बिहार राज्य के जिला मुंगेर से विपिन कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि बिहार में चमकी बुखार की ताप से उभरा ही नहीं था कि बाढ़ ने उसकी परेशानियां और भी बढ़ा दी है।बिहार में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से जानमाल की भारी हानि हुई है,इसके साथ ही पड़ोसी राज्य असम में भी बाढ़ से काफी नुकसान की खबरें मिल रही है। यह स्थिति तब है जब केंद्र और राज्य सरकारों के आपदा प्रबंधन तंत्र राहत और बचाव कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं। बिहार में नुकसान का आकलन इससे भी लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री ने इस बार की तबाही को 1987 में आई बाढ़ से भी ज्यादा बताए हैं। असम और बिहार देश के दो ऐसे सीमावर्ती राज्य हैं जिन्हें लगभग हर साल बाढ़ का प्रकोप से झेलना ही पड़ता है। बिहार की बात करें तो इस मौसम में अक्सर नेपाल से आने वाली नदियां यहां तबाही का मंजर ही लेकर आती है. हम भले ही प्राकृतिक आपदाओं को रोक नहीं सकते हैं लेकिन आपसी तालमेल से इसे होने वाले नुकसान को कम कर ही सकते हैं।
