संसद के सदस्यों को बढ़ाई गई पत्तियों से जो शब्द हटाए गए उनका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि वर्तमान में जो डाल सत्ता में है उसकी और उनके वैचारिक संगठन को हमेशा से इन शब्दों से बन रहा है इसका कारण कि वे देश को हिंदू राष्ट्र बनाया ना चाहते हैं उनके इस विचार के फलीभूत होने में यह शब्द गाहे - बगाहे आडे आते रहे हैं।आज हमारे साथ सिविल सर्विसेज ट्यूटोरियल के संचालक एवं एडॅ. मधुकर गायकवाड़ सर के साथ मोबाइलवाणी पर विशेष बातचीत कर कर इन विषयों पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की।
