मध्यप्रदेश राज्य के छिंदवाड़ा जिले से योगेश गौतम मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं, कि विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेले का स्वरूप बदलने के लिए प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं। परंतु अभी भी नाकाफी साबित हुए हैं। एक नदी के दोनों ओर खड़े हजारों लोग एक दूसरे पर पत्थर के बरसात करते हैं। सुबह से शाम तक पत्थरबाजी में हर साल सैकड़ों लोग घायल भी होते हैं। यह कुछ लोगों की मृत्यु हो चुकी है, तो कई लोग अपनी आंखें गवा चुके हैं। यह नजारा हर वर्ष विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेले में देखने को मिलता है। आस्था और परंपराओं का प्रभाव ऐसा कि अब तक मेले का स्वरूप बदलने के लिए कई प्रयास किए गए। लेकिन नाकाम ही साबित हुए हैं कोर्णाक आल में भी स्थानीय लोग मेले का मोह नहीं छोड़ पाए हैं।
