इको क्लब के छात्रों ने लिया संकल्प , नहीं करेंगे पीओपी मूर्तियों का प्रयोग इको क्लब के छात्र चला रहे हैं, घर-घर बीज गणेश, घर-घर विसर्जन अभियान इको क्लब रामाकोना के छात्रों की अभिनव पहल, रामाकोना-शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामाकोना के हरीतिमा इको क्लब के छात्र-छात्राओं ने आगामी गणेश उत्सव ,दुर्गा उत्सव सहित अन्य उत्सव में पीओपी की बनी मूर्तियों का प्रयोग न करने का संकल्प लिया। संस्था प्राचार्य ए एच खान के निर्देशन एवं हरीतिमा इको क्लब प्रभारी चंद्रकांत नाचनकर के मार्गदर्शन में छात्र छात्राओं ने स्थानीय मूर्तिकार श्री ओमकार करवंदे की रंगशाला में जाकर मिट्टी के गणेश एवं बीज गणेश बनाने की प्रक्रिया को समझा। इस दौरान श्री करवंदे ने छात्र छात्राओं को मिट्टी की मूर्तियां बनाने की बारीकी से अवगत कराया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों का प्रयोग न कर मिट्टी की बनी एवं हानिकारक रंगो से रहित मूर्तियों की स्थापना करने की लोगों से अपील की है। ज्ञात हो कि संस्था का हरीतिमा इको क्लब प्रतिवर्ष पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन ऐप्को (भोपाल ) के वरिष्ठ वैज्ञानिक महेश मिश्रा, पर्यावरण शिक्षा अधिकारी दिलीप चक्रवर्ती तथा राष्ट्रीय हरित कोर के जिला नोडल अधिकारी विनोद तिवारी के समन्वय से प्रतिवर्ष गणेश उत्सव से पूर्व पीओपी मूर्तियों के बहिष्कार एवं बीज गणेश व मिट्टी के ही गणेश अभियान को संचालित करते आ रहा है। मिट्टी की बनी मूर्तियों का ही होता है विशेष महत्व हरीतिमा इको क्लब प्रभारी चंद्रकांत नाचनकर ने बताया कि भारतीय सनातन धर्म में मिट्टी की बनी मूर्तियों का ही विशेष महत्व होता है। इसके अतिरिक्त यह मूर्तियां पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी सुरक्षित होती है ।इसके विपरीत पीओपी से बनी मूर्तियां पानी में ना घुलने से जहां एक और धार्मिक आस्था को चोट पहुंचती है, वहीं दूसरी और पर्यावरण में अवांछनीय विघटनकारी पदार्थ जमा होने से उसे भी नुकसान पहुंचता है। श्री नाचनकर नेे छात्र छात्राओं को आगामी गणेश उत्सव में अपने घर पर ही गणेश प्रतिमा के विसर्जन की बात कही जिससेे नदियों एवं तालाबों में प्रदूषण होने से बचाया जा सके। इन्होंने दी सहभागिता इस कार्यक्रम में हरितिमा इको क्लब के श्रीरंग खंडाईत, स्नेहल ढालखंडाईत ,साहिल चचाने, रोहित धुर्वे, निलेश पातुरकर ,विक्की सोनेकर, अखिल बड़वाईक अनिकेत तलवारकर, हर्षल गुर्वे, प्रवीण पाटील, आंचल बोडखे, निहारिका सूर्यवंशी, कोमल बाविस्टाले, तीजल खडसे, समीक्षा पाल ,समीक्षा डोईजड, श्वेता गुर्वे ,खुशी नागदौने, अल्फिया नाज मंसूरी ,वैष्णवी धुंडे, पल्लवी भक्ते, साक्षी कामडे, महिमा पेठे, इशिका घोटेकर, अश्विनी वाठ, निशा कापसे सहित 34 छात्र-छात्राओं नें मूर्ति निर्माण की बारीकियों को समझा।