सुनील सोरेन,जिला धनबाद से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2007-2008 में सरकारी प्रशासनिक विद्यालयों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को निःशुल्क संथाली भाषा और ओलचिकी लिपि की पुस्तक दी गई थी।उस वितरण के बाद अब तक विद्यालयों में कोई पुस्तक का वितरण नहीं किया गया है जो क्षेत्रीय भाषा और जनजातीय भाषा के साथ भेद भाव को दर्शाता है।इसलिए इनका कहना है की पुस्तक का वितरण करने की पहल की जाये।

राधू राय,जिला धनबाद से मोबाइल वाणी के माध्यम से मौसम पर आधारित कविता प्रस्तुत कर रहे है जिसमे कहना है की मानसून का लक्षण दिखने लगा है,लोगो को अब मस्त भरी गर्मी से राहत मिलने लगी है।वही मौसम को देखते हुए किसानों ने खेतो में बीज डालने लगे है

जिला धनबाद बाघमारा प्रखंड से राधू राय मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार आज चरम सिमा को पार कर रहा है।आवेदक को अपनी किसी भी कार्य को कराने में पहले घुस देना पड़ता है।यदि कोई घुस नहीं देता है तो उनकी फाइल दफ्तरों में पड़ी रह जाती है।और आवेदक दफ्तर के चक्कर लगाते थक जातें हैं।अंत में जब अधिकारी को घुस देते हैं तभी उनकी फाइल आगे बढ़ाई जाती है।आज सरकार के हर विभाग में भ्रष्टाचार फैला हुआ है। सरकार के हर योजनाओं को पूरा करने में रिस्वत की मांग की जाती है। ऊपर के अधिकारी पदाधिकारी इस भ्रष्टाचार से भली भाति परिचित होने के बाद भी इस पर रोक लगाने की पहल नहीं करते हैं। जिसके कारण आज भ्रष्टाचार महज शिस्टाचार बन कर रह गया है।इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे-ऊपरी आय पर विश्वास, अच्छे जीवन व्यतीत करने की लालसा और दहेज़ भी इसके एक मुख्य कारण हो सकते हैं।

जिला धनबाद से बीरबल महतो मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि झारखण्ड में भरस्टाचार चरम सीमा पर पहुँच गया है,कोई भी काम बिना घुस के नहीं हो रहे है।इस बात को मुख्यमंत्री तक को पता है कि कोई भी काम घुस के बिना नहीं हो सकता है.इसलिए सबसे पहले इसपर रोक लगाना चाहिए क्योकि जबतक भरस्टाचार पर रोक नहीं लगेगी तबतक राज्य का विकास संभव नहीं है।वही भरस्टाचार सभी सरकारी क्षेत्र में देखा जाता है फिर चाहे वह मनरेगा,जाति प्रमाण पत्र बनाने के विषय में या फिर रोड के विकास की बाते हो,किसी भी विकास में कुछ भी कार्य करवाने में घुस चाहिए होता है.जिसकारण भरस्टाचार चरम सीमा पर पहुँच रही है।इसलिए सरकार सबसे पहले भरस्टाचार को रोकने का काम करे।

जिला धनबाद के बाघमारा प्रखंड से मदन लाल चौहान मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि राजगंज में स्वास्थ्य केंद्र के नए भवन का किया गया उद्घाटन।बाघमारा प्रखंड अंतर्गत राजगंज स्वास्थ्य केंद्र में नए भवन का उद्घाटन विधायक द्वारा फीता काटकर किया गया।इस उद्घाटन के अवसर पर सिविल सर्जन,प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी,चिकित्सक,लेखा पदाधिकारी,ए.एन.एम.एवं सैकड़ो स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे।

राधू राय,जिला धनबाद के बाघमारा प्रखंड से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि भारत में पर्वो का बहुत महत्व होता है।भक्तगण पर्वो को भक्ति-भाव हर्षोल्लाष के साथ मनाते है।पर्व त्योहार से लोगो को शांति और ख़ुशी मिलती है।वर्षो से वट सावित्री पर्व का बहुत ही महत्व है।इस पर्व में सुहागने अपने पति की लम्बी उम्र और उज्जवल भविष्य के लिए वट सावित्री का उपवास रखकर वट वृक्ष के नीचे विधि-विधान के साथ तमाम रस्मों को अदा की तथा इसमें सावित्री कथा सुनने की प्रथा का भी प्रचलन है।

राधू राय,जिला धनबाद के बाघमारा प्रखंड से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि गम के मारे किसान बेचारे बन गएँ हैं । भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी के नारे आज भी प्रासंगिक है उन्होंने जय जवान जय किसान का नारा दिया था। वे कहते हैं कि जिस तरह देश की सीमा पर देश के जवान कड़ी धुप में तमाम तरह के तकलीफो को झेलकर भारत की रक्षा करते है और हम सभी चैन की नींद सोते है।ठीक उसी तरह देश के किसान हमारे लिए कठिन परिश्रम कर फसलों को उगाते है जिसे खाकर हम जिन्दा रहते हैं। लेकिन विडम्बना यह है कि इस कृषि प्रधान देश में भी यहां के किसानो की खेती पूरी वर्षा पर ही निर्भर होती है। जब वर्षा होती है ,तो किसान फसल उपजाते है और अगर किसी कारणवश वर्षा नहीं होती है तो खेती भी नहीं हो पाती।जिससे किसानों की मेहनत,परिश्रम और पूँजी पर पानी फिर जाता है।यह एक वजह है कि किसान गहरी चिंता में दुब जाते और कई बार वे नशे का शिकार हो जाते है।क्योकि वे ऋण लेकर खेती करते हैं और और फसल ख़राब होने के कारण वे महाजन से ऋण को भी चुकता नहीं कर पाते हैं।और कई बार महाजनो के दबाव में आकर किसान आत्म हत्या तक करने लग जाते है। बावजूद इसके सरकार की ओर से उचित सिंचाई उपकरण की व्यवस्था नहीं होती है और अगर होती है भी तो भरस्टाचार के कारण उसका लाभ नहीं उठा पाते है।फसल बीमा की राशि सही समय पर नहीं मिलना,समय पर खाद और बीज का लाभ नहीं मिल पाना किसानो की परेशानी का कारण बन गया है। इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार के तर्ज पर अन्य परदेशो में भी किसानो के ऋण माफ़ करने की जरुरत है

धनबाद जिला के बाघमारा प्रखंड से मदनलाल चौहान जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि सरकार द्वारा धनबाद -चंद्रपुरा रेल लाइन बंद करने के फैसले के विरोध में आंदोलन की गूंज सुनाई देने लगी है। उन्होंने बताया कि अगर धनबाद -चंद्रपुरा रेल लाइन बंद होती है, तो यहां के लोगों के समक्ष बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो जायेगी।जिसका सीधा असर व्यापार एवं शिक्षा पर पड़ेगा। ऐसी स्थिति में धनबाद -चंद्रपुरा रेल लाइन को बंद होने से बचने के लिए स्थानीय नागरिकों ने हस्ताक्षर अभियान में शामिल होकर सरकार को पत्र सौपने की योजना बनाई है। वे कहते हैं कि सरकार पहले यहां पर लोगों के लिए रोजगार की कोई वैकल्पिक व्यवस्था करे उसके बाद ही धनबाद -चंद्रपुरा रेल लाइन बंद करने के सम्बन्ध में कोई कदम उठाए।

धनबाद जिला के बाघमारा प्रखंड से बीरबल महतो जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां के अधिकतर लोग कृषि कार्यों से जुड़े हुए हैं।अगर झारखण्ड प्रदेश की बात की जाये ,तो राज्य में सिचाई व्यवस्था न होने के कारण यहां के किसान पूरी तरह से मानसूनी वर्षा पर निर्भर रहते है, जो कृषि क्षेत्र में पिछड़ेपन का एक मुख्य वजह है। बीरबल जी कहते हैं कि अगर सरकार चाहे ,तो राज्य में भी हरित क्रांति लाया जा सकता है। वे कहते हैं कि इसके लिए सरकार को चाहिए कि वे केंद्र सरकार से मिलकर यहां के किसानों के लिए नदियों से नहर निकालकर सिचाई का साधन मुहैया कराये। ऐसा करने से यहां के किसान सही तरह से फसल उपजा पाएंगे और वे आर्थिक रूप से समृद्ध होंगे , जिससे यहां पर व्याप्त गरीबी को कुछ हद तक दूर करने में मदद मिलेगी । साथ ही सरकार के इस पहल से राज्य से हो रही बड़ी संख्या में पलायन को भी कम किया जा सकेगा।

जिला धनबाद ,प्रखंड बाघमारा से राधू राय जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश और यहां के लगभग 70 प्रतिशत आबादी कृषि कार्य से जुड़े हैं। गौर करने वाली बात है कि देश की इतनी बड़ी आबादी कृषि कार्य से जुड़े होने के बावजूद यहां के किसान पूरी तरह से मानसूनी वर्षा पर निर्भर रहते हैं।सिचाई के साधन नहीं होने के कारण फसल बरबाद हो जाता हैं ऐसे में किसानों के समक्ष ऐसी स्थिति उतपन्न हो जाती है कि किसान कृषि कार्य के लिए बैंक से लिए गए कर्ज को भी चुकता नहीं कर पाते हैं। और कई बार किसान ऐसी हालत में आत्महत्या तक करने को विवश हो जाते हैं। वे कहते हैं कि सरकार द्वारा देश में किसानों के लिए वर्षा के अलावा सिचाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की जरुरत है ताकि किसान सही तरह फसल उपजा सकें।