आदिवासी एकता मंच का पहला डुमरी अनुमंडल क्षेत्र में रात्रि जतरा मेला पर रोक लगाने की मांग. समाज के लोगों द्वारा सौपा गया अनुमंडल पदाधिकारी डुमरी को आवेदन. गिरिडीह :- जिले के डुमरी आदिवासी एकता मंच के सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा अतकी पंचायत के मुखिया ईश्वर हेंब्रम की अगुवाई में गुरुवार को डुमरी अनुमंडल पदाधिकारी के नाम एक आवेदन पत्र सोपा गया जिसमें डुमरी अनुमंडल क्षेत्र के आदिवासी समाज द्वारा रात्रि में आयोजित होने वाले जतरा मेला पर रोक अथवा वर्जित करने की मांग की गई है. आवेदन पत्र के अनुसार रात्रि में आयोजित होने वाले यात्रा मेला से दुष्कर्म तथा दुर्घटना होने की बड़ी संभावना रहती है जिससे समाज में गलत संदेश जाता है इस विषय पर अतकी पंचायत के मुखिया ईश्वर हेंब्रम ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा की पिछले वर्ष डुमरी में आयोजित जतरा मेला में भाग लेने आए दो युवकों की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई थी. इन सारी घटनाओं को देखते हुए आदिवासी एकता मंच डुमरी द्वारा डुमरी अनुमंडल पदाधिकारी को जतरा मेला के आयोजन को वर्जित करने की मांग की गई है इस दौरान समाज के कई गन्य मान्य लोग उपस्थित थे. रिपोर्ट :- दिनेश कुमार रजक, गिरिडीह झारखण्ड. सम्पर्क :6207602624
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झारखण्ड राज्य से सीमा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण अचानक सूखा और बाढ़ फसलों के लिए सबसे विनाशकारी स्थितियां हैं, जो भारत में कृषि उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। सूखा मिट्टी की नमी को खत्म कर फसलें सुखा देता है, जबकि अचानक आई बाढ़ मिट्टी में ऑक्सीजन कम करके पौधों की जड़ों को सड़ा देती है और पोषक तत्वों को बहा ले जाती है।इससे बचाव के लिए कुछ उपाय अपनाया जा सकता है। जैसे - बाढ़ सहन करने वाली फसलों की किस्में और मिश्रित खेती अपनाना।दूसरा,सूखे से निपटने के लिए मिट्टी के प्रबंधन में सुधार और जल संरक्षण की तकनीकों का उपयोग करना।तीसरा, जल निकासी प्रणालियों का प्रबंधन करना ताकि बाढ़ के पानी को जल्दी निकाला जा सके।
झारखण्ड राज्य के धनबाद जिला से शिल्पी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि जल संरक्षण से खेती में मदद मिलेगी। अगर लोग वर्षा के जल को खेत में चारों ओर से मेढ़ बनाकर ढलान से बहने से रोके तो पानी मिट्टी में डिस कर नमी बनाता है। इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और अगर खेत में तालाब के लिए गड्ढा खोदा जाए तो इसमें भी वर्षा जल को एकत्रित करके रख सकते हैं जो बाद में सिंचाई में काम आएगा। जल संरक्षण बहुत जरूरी है।
इस आख़िरी कड़ी में पानी बचाने और ज़मीन को सँभालने के आसान तरीकों पर बात होती है। खेती और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की समझ इस एपिसोड का मुख्य संदेश है |
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इस एपिसोड में बारिश न होने और फिर अचानक ज़्यादा होने से फसल को होने वाले नुकसान की बात है। मौसम की मार और उससे जूझते किसान की असली परेशानी यहाँ दिखाई देती है।
गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू जैविक खेती के लिए नीमास्त्र के प्रयोग और लाभ की जानकारी दे रहे हैं ।
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