गुरू महर्षि धौम्य एवं शिष्य आरूणि से लेकर डा० सर्वपल्ली राधाकृष्णन के शानदार परम्परा के वाहक शिक्षक दिवस आज एसी कमरे में बैठकर, केक काटकर गीत-गाना गाने, डांस करने, पुरस्कार लेने- देने, हैप्पी टीचर्स डे कहकर सेलिब्रेट करने मात्र का दिवस बनकर रह गया है. ये बातें शिक्षक दिवस पर एक आलेख के माध्यम से शहर के संत पाल स्कूल की एमए-बीएड शिक्षिका सह महिला संगठन ऐपवा जिलाध्यक्ष बंदना सिंह ने कहा.उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस बेहतर शिक्षा के माध्यम गुरू-शिष्य परम्परा को मजबूत एवं निर्वाह करने का संकल्प दिवस है. शिक्षा हमारे अंदर के अंधेरा को दूर कर प्रकाश फैलाता है. यह विश्व का सबसे सशक्त माध्यम है. इसे तमाम ग्रंथों में भी स्थान दिया गया है. सामान्य आदमी से लेकर राजे- रजवाड़े ने इसे सर्वोत्तम माना है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।