बाल श्रम, बाल विवाह, यौन शोषण, बच्चों का खरीद फरोख्त बढ़ा है। प्रवासी मजदूर और स्थानीय कामगारों को रोजगार छीन जाने की वजह से परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो गया है। हिंसा का वातावरण तैयार करने में हमारी लोकतांत्रिक सरकार हर कोशिश कर रही है। बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य की समस्या व्यापक बनती जा रही है। आज राज्य और केन्द्र सरकारों नें आमजन को मरने मारने के लिए छोड़ दिया है। चुनाव का खतरा भी सामने है। बाढ़ की विभीषीका भी हमारे सामने है। उस पर वज्रपात की मार और सामाजिक अन्याय वाली सत्ता की मार।
