राज्य की सभी पंचायतों और गांवों में सहकारी समितियों का गठन होगा। इन समितियों को मदद देकर दुग्ध उत्पादन, मछली उत्पादन को बढ़ाया जाएगा। साथ ही, कृषि और उद्यान से संबंधित योजनाओं को पूरा किया जाएगा। इससे किसान, पशुपालक और मछली पालन करने वाले आर्थिक रूप से मजबूत बनेंगे। हाल ही में राज्य और जिलास्तर पर गठित सहकारिता विकास समिति योजनाओं के क्रियान्वयन में मदद करेगी। पहले से चल रही योजनाओं का फायदा इन सहकारी समितियों को दिलाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बैंकों से ऋण मुहैया कराई जाएगी। सहकारिता विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। इसके लिए उन गांवों और पंचायतों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां पहले से कोई सहकारी समिति गठित नहीं है। वर्तमान में राज्य में 42 हजार 985 सहकारी समितियां हैं। इनमें 8463 प्राथमिक कृषि साख सहयोग समिति (पैक्स), 523 व्यापार मंडल सहयोग समिति, 7626 दुग्ध सहयोग समिति, 479 प्रखंड स्तरीय मत्स्यजीवी सहयोग समिति, 1089 बुनकर सहयोग समिति हैं। इसके अलावा गृह निर्माण, ग्रामोदय, महिला विकास सहयोग समिति, ताड़-गुड़ उत्पादक सहयोग समिति सहित 27 प्रकार की सहकारी समितियां हैं। इनमें पैक्स, व्यापार मंडल और मत्स्यजीवी सहयोग समितियों को छोड़कर अन्य सभी मृतप्राय हैं।
