भारत के रक्सौल और नेपाल के वीरगंज के बीच जल्द ही यात्री ट्रेनों का परिचालन किया जा सकता है। इसके लिए रक्सौल और वीरगंज के बीच रेललाइन का विद्युतीकरण किया जाएगा। रेललाइन विद्युतीकरण पर तीन करोड़ 47 लाख 51 हजार रुपये खर्च होंगे। विद्युतीकरण कार्य के लिए पूर्व मध्य रेल के निर्माण विभाग के उप मुख्य अभियंता ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। 25 केवी ओएचई के डिजायन, ड्राइंग, मॉडिफिकेशन, टेस्टिंग व रनिंग पर 3.47 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 15 जून तक टेंडर प्रक्रिया पूरी होगी। फिलहाल रक्सौल व ड्राईपोर्ट (वीरगंज) के बीच मालगाड़ी का परिचालन हो रहा है। विद्युतीकरण पूरी होने के बाद यात्री ट्रेन चलाने के लिए रेलवे के स्तर से केंद्र सरकार से मंजूरी ली जाएगी। इसके बाद चार किमी लंबे रक्सौल-वीरगंज रेलखंड पर यात्री ट्रेनों का परिचालन शुरू हो सकेगा। पहले चरण में पैसेंजर ट्रेनें चलायी जाएगी। मुजफ्फरपुर व रक्सौल के बीच चलने वाली सवारी ट्रेनें व इंटरसिटी एक्सप्रेस को वीरगंज तक विस्तारित किया जा सकता है। वर्तमान में मधुबनी के जयनगर और नेपाल के कुर्था तक यात्री ट्रेनों का परिचालन हो रहा है। इससे जनकपुरधाम की यात्रा भारतीय श्रद्धालुओं के लिए आसान हो गयी है। रक्सौल व काठमांडू तक रेललाइन के लिए डीपीआर तैयार रक्सौल और काठमांठू के बीच 136 किमी लंबी नई रेललाइन परियोजना के अधीन रक्सौल व वीरगंज के बीच मालगाड़ी का परिचालन हो रहा है। दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए मालगाड़ी का परिचालन हो रहा है। रक्सौल व काठमांडू के बीच नई रेल लाइन के निर्माण के लिए 2019 में सर्वे हो चुका है। कोंकण रेलवे ने सर्वे के बार डीपीआर तैयार की है। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट रेलवे को सौंपी जा चुकी है। रेलवे की निर्माण एजेंसी इरकॉन के माध्यम से परियोजना पूरी कराने पर मंथन चल रहा है। यह रेललाइन रक्सौल से वीरगंज, पथलैया व निजगढ़ होते हुए काठमांडू तक जाएगी। इसके बीस प्रतिशत हिस्से में सुरंग व पुल का निर्माण किया जाना है। पांच साल में प्रोजेक्ट पूरा होने की उम्मीद है।