स्कूली बच्चे स्वास्थ्य उपकेंद्रों की निगरानी करेंगे, ताकि किशोर-किशोरियों के साथ ग्रामीणों के भी स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में मनमानी नहीं हो। पूर्वी चंपारण समेत 14 जिलों में एडोलसेंट फ्रेंडली क्लब बनेगा। राज्य स्वास्थ्य समिति ने इन जिलों के सीएस को इसको लेकर निर्देश दिया है। इसके लिए हर स्कूल से दो-दो बच्चों को प्रशिक्षित किया जाएगा। स्वास्थ्य उपकेन्द्रों पर एनएम, आशा इन बच्चों के साथ बैठक करेंगी। बैठक से लेकर बच्चों को ट्रेंड करने तक के लिए राशि आवंटित की गई है। बच्चों का फीडबैक शिक्षा विभाग के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को भेजा जाएगा। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने इसे लेकर निर्देश दिया है। कार्यपालक निदेशक ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में इन 14 जिलों में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत समुदाय स्तर पर जागरूकता लाने को एडोलसेंट हेल्थ एंड वेलनेस डे (एएचडब्ल्यूडी) मनाने के साथ एडोलसेंट फ्रेंडली क्लब बनाया जाना है। भारत सरकार द्वारा अनुमोदित राशि राज्यस्तर से जिले को आंवटित की गई है। एएचडब्ल्यूडी 14 जिलों के सभी सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 वर्ग के बच्चों के बीच छह माह के अंतराल पर वर्ष में दो बार किया जाना है। प्रत्येक एएचडब्ल्यूडी मनाने को लेकर 2500 हजार रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें सहयोग करने को आशा को प्रोत्साहन राशि 200 रुपये मिलेगा। बच्चों के फीडबैक पर एक्शन नहीं लिया तो होगी कार्रवाई सभी स्कूल में स्वास्थ्य विभाग की मदद से आशा दो पीयर एडुकेटर साथियों का चयन कर उनको प्रशिक्षित करेंगी। एक क्लब में कम से कम 20 पीयर एडुकेटर यानि 20 विद्यार्थी होंगे। ये बच्चे अपने स्कूल के बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर लगातार जागरूक करेंगे। बच्चों की जांच से लेकर उनके इलाज पर ये नजर रखेंगे। यही नहीं, उप स्वस्थ्य केन्द्र पर आने वाले ग्रामीणों के साथ भी अगर किसी तरह की गड़बड़ी होती है या इलाज नहीं होता है तो उसकी रिपोर्ट अपने स्कूल के माध्यम स्वास्थ्य विभाग को करेंगे। स्वस्थ्य विभाग बच्चों के फीडबैक पर त्वरित एक्शन लेगा। डीईओ ने कहा कि अगर बच्चों के फीडबैक पर त्वरित एक्शन नहीं होता है तो इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को जाएगी।