गेंदा की खुशबू और उसकी खूबसूरती के लिए अब साल भर का इंतजार नहीं करना होगा। बिहार कृषि विवि बीएयू सबौर ने स्थानीय मिट्टी और वातावरण के अनुकूल गर्मी में फूल देने वाली गेंदे की किस्म विकसित की है। बताया जाता है कि दो वर्षो तक इसकी प्रायोगिक खेती की जा चुकी है। इतना ही नहीं देश के 21 केंद्रों पर इसका प्रत्यक्षण भी किया गया। अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर रिलीज किया जाएगा। पांच वर्षो के प्रयास से विकसित हुए इस प्रभेद को फिलहाल बीआरएम 113 कोड दिया गया है। प्रभेद जारी होने के बाद इसे नाम दिया जाएगा। नए प्रभेद का ईजाद युवा वैज्ञानिक डॉ. श्यामा कुमारी और डॉ. चंदन राय ने पुष्प विभाग के अध्यक्ष डॉ. रणधीर कुमार की देखरेख में किया है। 42 डिग्री सेल्सियस पर भी खिलेंगे फूल परंपरागत गेंदे के लिए आदर्श तापमान 18 से 26 डिग्री सेल्सियस तक है। नया प्रभेद 42 डिग्री सेल्सियस तापमान तक में फूल देता है। यह गहरा नारंगी रंग का भरा और गठा हुआ है। बिचड़ा तैयार होने में 35 दिन लगते हैं। कुल 70-75 दिन में फूल तैयार हो जाता है। प्रति हेक्टेयर 800 ग्राम बीज की खपत होती है और 100 से 120 क्विंटल उत्पादन होता है। फरवरी के पहले सप्ताह में इसे लगाया जाता है। शादी के समय बढ़ जाती है गेंदे की मांग अधिकतर शादियां गर्मी के समय होती हैं। इस समय फूलों की मांग बढ़ जाती है। बताया जाता है कि इस फूल का कारोबार जिले में वृहत पैमाने पर होता है। इसकी आपूर्ति कोलकाता और सिलीगुड़ी की मंडी से होती है। बिहार में महज 12 हेक्टेयर में फूल की खेती होती है। गेंदे की नई किस्म आने के बाद न केवल इसके रकबा में बढ़ोतरी होगी बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी।